खाटूश्यामजी मंदिर के शिखर पर चढ़ाया गया 374वां निशान, जानिए सूरजगढ़ के निशान की रोचक कहानी
खाटूश्यामजी, 15 मार्च। राजस्थान के सीकर जिले के खाटूश्यामजी कस्बे में जारी बाबा श्याम का फाल्गुन लक्खी मेला 2022 समाप्ति की ओर है। मंगलवार को खाटूश्यामजी मंदिर के शिखर पर सूरजगढ़ का निशान चढ़ाया गया। यूं तो खाटूश्यामजी के मेले में लाखों निशान आते हैं। सबसे खास सूरजगढ़ का निशान होता है, जो सालभर तक बाबा के शिखर पर लहराता है। खाटूश्यामजी और सूरजगढ़ के निशान की कहानी बड़ी रोचक है।

सूरजगढ़ कस्बे से खाटूश्यामजी निशान आने की परंपरा
बता दें कि राजस्थान के झुंझुनूं जिले में हरियाणा बोर्डर पर स्थित सूरजगढ़ कस्बे से खाटूश्यामजी निशान आने की परंपरा विक्रमी संवत 1752 यानी करीब 325 साल पहले अमरचंद भोजराजका परिवार ने शुरू की थी। भोजराजका परिवार के नागेंद्र भोजराजका की मानें तो एक विवाद के चलते अंग्रेजों के जमाने में श्याम बाबा के मंदिर में ताला लगा दिया था। तब सूरजगढ़ से निशान लेकर पहुंचे सांवलाराम के कहने पर भक्त मंगलाराम ने मोरपंख से ताला तोड़ दिया था। उस दिन के बाद से सूरजगढ़ के निशान की मान्यता सबसे ज्यादा बढ़ गई और केवल ये निशान ही बाबा के मंदिर के शिखर पर चढ़ता है।
सिर पर सिगड़ी रखकर चलती हैं महिलाएं
बता दें कि सूरजगढ़ से श्याम भक्त अनूठे अंदाज में निशान लेकर खाटूश्यामजी पहुंचते हैं। श्याम भक्त नागेंद्र के अनुसार ने बताया कि जैसे-जैसे सूरजगढ़ से निशान लेकर पदयात्रा आगे बढ़ती है। वैसे-वैसे पैदल यात्रियों की संख्या में इजाफा हो जाता है। रास्ते में पैदल यात्रियों की सेवा करने वालों में भी होड़ मची रहती है। इस निशान के साथ महिलाएं भी अपने सिर पर सिगड़ी रखकर चलती हैं।
इसके पीछे मान्यता है कि जिस महिला ने बाबा के सामने अपनी मुराद रखी और वह पूरी हो गई तो वह पदयात्रा में पूरे रास्ते सिर पर सिगड़ी रखकर पहुंचती है और बाबा को अर्पित करती है। ये महिलाएं पूरे रास्ते बाबा के भजनों पर नाचते-गाते श्रद्धाभाव के साथ पहुंचती हैं। पदयात्रा में ऊंटगाड़ियां साथ चलती हैं।
सूरजगढ़ से खाटूश्यामजी की दूरी
सूरजगढ़ से दो निशान खाटूश्याम मंदिर के लिए रवाना होते हैं। एक प्राचीन श्याम मंदिर से और दूसरा श्याम दरबार से रवाना होता है। श्याम दरबार का निशान पद यात्रा के साथ 9 मार्च सुबह 11 बजे के करीब रवाना हुआ। दूसरा निशान प्राचीन मंदिर से 10 मार्च को रवाना हुआ। दोनों निशान बाबा श्याम मंदिर के शिखर पर एक साथ ही द्वादशी के दिन चढ़ाए जाते हैं। सूरजगढ़ के दोनों निशानों को चढ़ाने के लिए खास इंतजाम किए जाते हैं।












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