अपने हक के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने सड़क पर बिताई रात
अजमेर। एक ओर जहां सरकार बेटा-बेटी को समानता का अधिकार देने पर जोर दे रही है, वहीं राजस्थान सेंट्रल यूनिवर्सिटी छात्र और छात्राओं में भेदभाव कर रही है। छात्राओं ने यूनिवर्सिटी पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार की रात सड़क पर गुजारी।

छात्राओं का आरोप है कि राजस्थान विश्वविद्यालय प्रबंधन उनके साथ सौतेले व्यवहार कर रहा है। छात्राओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि राजस्थान सेंट्रल यूनिवर्सिटी छात्रों की तुलना उनके साथ भेदभाव कर रही है। हॉस्टल के टाईमिंग की बात हो या फिर कक्षा कक्षा की। हर जगह छात्राओं से भेदभाव किया जा रहा है।
इसको लेकर कई बार विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार केवीएस कामेश्वर राव और वाईस चांसलर अरूण के.पुजारी को शिकायत की गई। लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। छात्राओं ने साफ कहा कि उनके अधिकारों में कटौती कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अपनी मांगों को लेकर छात्राओं ने मैस का भी बहिष्कार किया।
जिम्मेदार कौन
सवाल तो यह उठता है कि छात्राएं अपनी मांगों को लेकर रात भर सड़क पर बैठी रही। यदि कोई अनहोनी घटना हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता? इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रबंधन से सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन रजिस्ट्रार और वाईस चांसलर से बात नहीं हो सकी। वहीं जनसम्पर्क अधिकारी अनुराधा मित्तल ने कहा कि छात्राओं से वार्तालाप किया जा रहा है। जल्द ही उन्हें आश्वस्त कर दिया जाएगा।












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