राजस्थान: सात बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज, पिता की अर्थी को दिया कंधा और मुखाग्नि
बूंदी, 26 जनवरी: खबर राजस्थान के बूंदी जिले से है, यहां सात बेटियों ने पुत्र द्वारा शव को कंधा और मुखाग्नि देने की रूढ़िवादी परम्परा को तोड़ा और बेटे का फर्ज निभाया है। जी हां.. बाबाजी का बड़ा गांव में सात बेटियों ने अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया। जब वो गांव में होकर निकली सभी ग्रामीण शवयात्रा के साथ लग गए। बेटियों के इस फैसले का कस्बे के बुजुर्ग लोगों ने भी समर्थन किया।

बाबाजी का बड़ा गांव निवासी 95 वर्षीय रामदेव कलाल के कोई पुत्र नहीं था। वो काफी समय से बीमार चल रहे थे और मंगलवार (25 जनवरी) को उनका निधन हो गया। ऐसे में उनके निधन के बाद ग्रामीण एवं परिजनों में चर्चा होने लगी कि अब शव को कंधा और मुखाग्नि किस के द्वारा दी जाएगी। इस बीच उनकी सात बेटियां कमला, गीता, मूर्ति, पूजा, श्यामा, मोहनी और ममता आगे आई। सभी सात बहनों ने आगे आकर कहा, हम अपने पिता के अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया निभाएंगे।
हिंडोली के कलाल समाज के गणमान्य एवं बुजुर्ग लोगों द्वारा सहमति जताने के बाद सातों पुत्रियों गांव में होकर जब बेटियों के कंधों पर शवयात्रा निकली। इस दौरान शवयात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बेटियों ने मुक्तिधाम जाकर मुखाग्नि दी। मृतक की बड़ी पुत्री कमला ने कहा कि हमारे कोई भाई नहीं था। लेकिन पिता ने हमारा पालन-पोषण लड़कों की तरह किया। पढ़ाई कराने से लेकर जीवन जीने तक प्रत्येक क्षेत्र में पिता ने लड़कों की तरह रहना सिखाया। करीब पांच साल पहले मां का निधन हो गया था।












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