गांव नयाबास यूं बना ऑफिसर्स फैक्‍ट्री, पहले चोरी-डकैती के लिए बदनाम, अब दिए 15 IAS-5 IPS समेत 600 अफसर

IAS IPS Village Nayabas Neem ka thana Rajasthan: संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक प्रश्‍न के जवाब में बताया कि भारत में 1 जनवरी, 2024 तक, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1,000 से ज़्यादा और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 500 से ज़्यादा पद रिक्त हैं। देश में आईएएस अधिकारियों के लिए स्वीकृत पद 6,858 हैं। वर्तमान में आईएएस अफसरों के 5,542 पद ही भरे हुए हैं। शेष खाली हैं। इसी तरह से आईपीएस में स्वीकृत पद 5,055 हैं। 4,469 आईपीएस अधिकारी ही कार्यरत हैं। आइए इस बीच जानते हैं कि एक ऐसे गांव की कहानी जो आईएएस-आईपीएस की फैक्‍ट्री जैसा है।

शिक्षा से सबकुछ संभव है। इसका जीता जागता उदाहरण राजस्‍थान का गांव नयाबास है। यह गांव कभी चोरी, डकैती के लिए बदमान हुआ करता था और आज यूपी के गांव के माधोपट्‌टी की तरह नयाबास भी अफसरों वाले गांव के नाम से पहचान बना चुका है।

राजस्‍थान के सीकर जिले (नया जिला नीमकाथाना) के गांव नयाबास अफसरों की फैक्‍ट्री बन चुका है। यहां से 15 आईएएस व 5 आईपीएस अधिकारी निकल चुके हैं। नया बास से अब तक कुल 25 युवाओं ने यूपीएससी की सिविल सेवा पास की है।

राजस्‍थान में सबसे ज्‍यादा आईएएस, आईपीएस अफसर देने वाले गांव नयाबास की आबादी महज 800 घरों की है, मगर यहां 500 से ज्‍यादा सरकारी अफसर हैं, जो विभिन्‍न जिलों व विभागों में कार्यरत हैं। बीते चार दशक में गांव नयाबास से 1600 लोग सरकारी नौकरी लग चुके हैं।

पूरा गांव करता था ऊंटों की चोरी

गांव नयाबास के सरकारी नौकरियों व अफसरों की कहानी 29 जून 1972 व केएल मीणा से जुड़ी है। हुआ यह था कि 1972 में नयाबास में चोर-डकैतों का प्रमुख ठिकाना हुआ करता था। पूरा गांव ही ऊंट, भैंस व अन्‍य तरह की चोरियों में लिप्‍त था।

बरकतुल्लाह खान सरकार ने चलाया ऑपरेशन

एक बार गांव नयाबास से एक जमींदार का ऊंट चोरी हो गया। ऊंट लौटाने के लिए चोरों ने पैसों की डिमांड की। मामला पुलिस तक पहुंचा। तत्कालीन बरकतुल्लाह खान सरकार के संज्ञान में भी मामला लाया गया। तब राजस्‍थान सरकार ने नयाबास से चोरों का सफाया करने के लिए विशेष ऑपरेशन चलवाया।

ऑपरेशन के तहत राजसथान पुलिस के पांच हजार जवानों ने एक साथ गांव नयाबास को घेर लिया। उस कार्रवाई में ऊंट पांव-मुंह बंधा हुआ एक चोर के घर की छत पर मिला।

शेखावाटी के पहले आईएएस बने केएल मीणा

साल 1972 में गांव नयाबास के एक-दो युवक सेना, पुलिस में भर्ती हो चुके थे। उन्‍हीं में से एक थे केएल मीणा, जो आईबी में एसआई थे। इत्‍तेफाक से जिस दिन पुलिस ने गांव नयाबास को घेरा तब केएल मीणा भी गांव आए हुए थे।

केएल मीणा से भी पुलिस ने चोरी के मामले में पूछताछ की। तब मीणा के मन में टीस लगी कि गांव के कई लोग चोरी-डकैती करते हैं, मगर बदनाम सब हो रहे हैं।

तब उन्‍होंने गांव में एक टीम बनाई और ऐलान किया कि अब गांव में चोरी के मामले में जब भी पुलिस आएगी तो उनकी टीम बताएगी कि चोर कौन है?

साथ ही मीणा ने तय किया कि बड़ा अफसर बनकर मिसाल पेश करेंगे और गांव के युवाओं को पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करेंगे। आईबी इंस्‍पेक्‍टर रहते हुए केएल मीणा ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और शेखावाटी के पहले आईएएस बने। फिर उनसे प्रेरित होकर तो कई युवाओं ने यूपीएससी निकाल लिया।

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