Rahul Kaswan vs Rajendra Rathore: चूरू में कस्वां-राठौड़ के बीच सियासी लड़ाई की पूरी कहानी, असली 'जयचंद' कौन?
Rajendra rathore jaichand Churu: राजस्थान में सबसे ठंडी जगह चूरू में इन दिनों सियासी पारा गर्म है। वजह ये है कि चूरू की तारानगर सीट पर राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा के दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ की हार के तार कांग्रेस विधायक नरेंद्र बुडानिया से होते हुए चूरू से भाजपा सांसद राहुल कस्वां से जुड़ रहे हैं।
7 बार के विधायक राजेंद्र राठौड़ ने 8वीं बार में तारानगर से अपनी पहली हार का ठिकरा 'जयचंद व विभिषण' के सिर पर फोड़ा है। कस्वां परिवार में किसी का नाम नहीं लिया। वहीं, राठौड़ के समर्थक सीताराम लुगरिया ने सार्वजनिक मंच से राठौड़ की हार के लिए राहुल कस्वां व उनके परिवार को जिम्मेदार ठहराया है।

पहले जानिए सीताराम लुगरिया ने कहा?
विकसित भारत संकल्प यात्रा कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सीताराम लुगरिया ने कहा कि 'मैंने 2004 का बलराम जाखड़ का चुनाव देखा है। आपने (राजेंद्र राठौड़) एक लक्ष्मण के रूप में चुनाव लड़कर बलराम जाखड़ को धूल चटाई और रामसिंह कस्वां (चूरू सांसद राहुल कस्वां के पिता) को यहां से विजयी बनाया है।'
लुगरिया आगे कहते हैं कि 'मैं खुले मन से कह रहा हूं। किसी को कोई दिक्कत हो तो बात कर लो। कस्वां परिवार ने पीठ पर खंजर घोंपने का काम किया है। अरे भले आदमी! तेरा राजनीतिक जीवन 1990 में 189 वोटों से शुरू करवाने वाला राजेंद्र राठौड़ था।'
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सीताराम लुगरिया यहीं पर नहीं रुके। आगे बोले कि 'राहुल कस्वां तुमने, तुम्हारी माता (राजगढ़ से पूर्व विधायक कमला कस्वां), तुम्हारे पिता (चूरू के पूर्व सांसद रामसिंह कस्वां) ने गांव-गांव ढाणी-ढाणी घूमकर जो कार्य किया है। नहीं राठौड़ साहब... (राजेंद्र राठौड़ के टोकने पर) गद्दारों की कोई जगह नहीं है।
सीताराम लुगरिया के बयान में एक बात गौर करने वाली है कि भले साल 2023 में राजेंद्र राठौड़ व राहुल कस्वां के परिवार के बीच सियासी रिश्तों में कड़वाहट हो, मगर 1990 के दशक में रामसिंह का राजनीतिक सफर राजेंद्र राठौड़ की वजह से शुरू हो हुआ और 2004 आते-आते तो इन दोनों की जोड़ी राम लक्ष्मण सरीखी नजर आई।
अब क्या राजेंद्र राठौड़ व राहुल कस्वां के परिवार के बीच वर्चस्व की लड़ाई है? क्या तारानगर में राजेंद्र राठौड़ की हार की वजह जाट-राजपूत वाली लड़ाई रही या फिर राहुल कस्वां अंदरखाने जयचंद या विभिषण की भूमिका निभा गए?
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इन सारे सवालों के पुख्ता जवाब तो सिर्फ राजेंद्र राठौड़ व राहुल कस्वां ही दे सकते हैं, मगर चूरू की सियासत के जानकार कहते हैं कि राजेंद्र राठौड़ व राहुल कस्वां व उनके परिवार का राजनीति सफर देख लो। सियासी अदावत की तस्वीर कुछ हद तक साफ हो जाएगी।
राठौड़ छात्रसंघ अध्यक्ष तो कस्वां सरपंच
चूरू के जिले के सरदारशहर उपखंड के गांव हरपालसर में जन्मे राजेंद्र राठौड़ साल 1978-79 में राजस्थान विश्वविद्यायल छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। वहीं, रामसिंह कस्वां चूरू जिले के गांव कालरी के सरपंच रहे। फिर 1990 के दशक में दोनों साथ-साथ ही राज्य व केंद्र की राजनीति में सक्रिय हो गए।

राठौड़ विधायक, कस्वां बने सांसद
राजेंद्र राठौड़ 1990 में जनता दल की टिकट पर पहली बार चूरू से विधायक बने और 1991 में रामसिंह कस्वां पहली बार से चूरू लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। राजस्थान में भैरोंसिंह शेखावत सरकार के जमाने में राठौड़-कस्वां के सियासी रिश्तों में खूब मिठास घूली थी।
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राठौड़ लगातार जीते, कस्वां का टिकट कटता रहा
1991 से 2018 तक राजेंद्र राठौड़ सात बार विधायक बने। छह बार चूरू विधानसभा सीट से और साल 2008 में तारानगर सीट से। कभी चुनाव नहीं हारे। इधर, रामसिंह कस्वां को पहले ही कार्यकाल के बाद लगातार दो बार 1996 व 1998 को हार को मुंह देखना पड़ा। तब नरेंद्र बुडानिया (तारानगर विधायक) सांसद बने थे। इसके बाद रामसिंह कस्वां लगातार 1999, 2004 व 2009 में सांसद का चुनाव जीते।

सुमेर फगेड़िया व वीरेंद्र न्यांगली हत्याकांड
साल 2009 के आस-पास चूरू में गैंगवार हावी रहा। सियासत पर जातीय रंग भी गाढ़ा हुआ। जाट समाज से सुमेर फगेड़िया व राजपूत समाज से वीरेंद्र न्यांगली हत्याकांड चर्चित रहे। दोनों ही नेताओं ने अपने-अपने समाज का साथ दिया। यह वो दौर भी था जब राठौड़ व कस्वां के बीच सियासी रिश्तों की तुरपाई भी उधड़ रही थी।

रामसिंह कस्वां का टिकट कटा तो तल्खी बढ़ी
चूरू लोकसभा चुनाव 2014 में रामसिंह कस्वां का टिकट कटवाने के लिए कथित तौर पर लॉबिंग हुई, जिसके लिए राजेंद्र राठौड़ पर भी सवाल उठे तो तल्खी भी बढ़ी। फिर रामसिंह कस्वां की बजाय उनके बेटे राहुल कस्वां को पहली बार टिकट मिला। मोदी लहर में राहुल कस्वां जीते भी। उसके बाद साल 2019 में फिर से जीत दर्ज की।
राठौड़ समर्थकों का ऑडियो वायरल
लोकसभा चुनाव 2014 के बाद कथित रूप से राजेंद्र राठौड़ समर्थकों का एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे यह रहे थे कि अगर रामसिंह कस्वां को टिकट मिलता और वे जीतते तो केंद्रीय मंत्री बन जाते, क्योंकि तीन बार लगातार जीते हुए थे। राहुल कस्वां को टिकट दिलवाकर हमने एक केंद्रीय मंत्री कम किया है।

जयचंद का नाम राजेंद्र राठौड़ बताएं-राहुल कस्वां
अब साल 2023 के विधानसभा चुनाव में तारानगर से हार के बाद राजेंद्र राठौड़ का जयचंद वाला बयान आया। इस पर राहुल कस्वां ने भी प्रतिक्रिया दी। मीडिया से बातचीत में राहुल कस्वां बोले कि राठौड़ साहब ने मेरा नाम कभी नहीं लिया। उनके समर्थक ले रहे हैं। बाकी जयचंद कौन है? ये तो राठौड़ ही बता सकते हैं।
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हार की स्थितियों का प्रदेशाध्यक्ष को भी पता
राहुल कस्वां यह भी कहते हैं कि वे राजेंद्र राठौड़ के पर्चा भरने से लेकर पीएम तक की सभा में गए। नॉमिनेशन वाले दिन थोड़ी देरी से 3 बजे पहुंचे थे। चुनाव प्रचार में भी दो-तीन बार फील्ड में रहे। तारानगर में राजेंद्र राठौड़ की हार के कारणों की परिस्थितियों का अंदाजा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी को भी है।
राजेंद्र राठौड़ बोले-ऐ दोस्त मैंने दुनिया देखी
जयचंद व विभिषण और भीतरघात वाले बयान के बाद भी राजेंद्र राठौड़ की प्रतिक्रिया आई। मीडिया ने राजेंद्र राठौड़ से जानना चाहा कि क्या जरूरत पड़ने पर जयचंद व विभिषण का नाम भी उजागर करोगे कभी? इस पर राठौड़ शायराना अंदाज में बोले कि 'ऐ दोस्त मैंने दुनिया देखी है। अच्छी तरह अपनी नजर से देखी है। यहां अच्छा बुरा कौन है? पहचाना मुश्किल है। ऐ दोस्त मैंने दुनिया देखी है'
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