Rajasthan: बाड़मेर में ब्लड डोनेशन कैंप में आखिर क्यों भड़क गई विधायक प्रियंका चौधरी, जानिए नाराजगी की असल वजह?
Rajasthan News: राजस्थान के बाड़मेर में आयोजित एक रक्तदान शिविर में उस समय असहज स्थिति उत्पन्न हो गई जब स्थानीय विधायक प्रियंका चौधरी ने प्रोटोकॉल का पालन न किए जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर की। यह शिविर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम में विधायक चौधरी ने स्वागत में हुई चूक पर आपत्ति जताते हुए कार्यक्रम स्थल को छोड़ने का निर्णय लिया। उनकी नाराजगी तब सामने आई जब भाजपा के जिला अध्यक्ष और पूर्व जिला अध्यक्ष को उनसे पहले सम्मानित किया गया। इसे उन्होंने अपने पद की गरिमा का उल्लंघन और अपमानजनक माना।

सीएमएचओ के समझाने पर भी नहीं मानीं विधायक
इस असहज स्थिति को संभालने के लिए सीएमएचओ डॉ. संजीव मित्तल ने सुलह के प्रयास किए और चौधरी से संवाद करने की कोशिश की। लेकिन विधायक ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया और कार्यक्रम छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने पीएमओ डॉ. मंसूरिया के साथ प्रोटोकॉल में चूक को लेकर तीखी नोकझोंक की।
विधायक प्रियंका चौधरी ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण सरकारी समारोहों में प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है। यह केवल पद की गरिमा नहीं। बल्कि जनता के प्रतिनिधि का सम्मान भी है।
मुख्यमंत्री की तारीफ, लेकिन नाराजगी बरकरार
कार्यक्रम में अपनी संक्षिप्त उपस्थिति के दौरान विधायक चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सराहना करते हुए उनके नेतृत्व को राजस्थान के विकास का मील का पत्थर बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री के कार्यकाल को अगले चार वर्षों में अभूतपूर्व उपलब्धियों का युग बताया। हालांकि आयोजकों के व्यवहार को उन्होंने अस्वीकार्य और असम्मानजनक करार दिया।
रक्तदान शिविर का उद्देश्य और घटनाक्रम
बाड़मेर जिला अस्पताल में आयोजित इस रक्तदान शिविर का उद्देश्य भजनलाल सरकार के कार्यकाल के पहले वर्ष की उपलब्धियों का जश्न मनाना था। हालांकि विधायक के प्रति आयोजकों के व्यवहार ने इस उत्सवपूर्ण माहौल को विवाद में बदल दिया।
विधायक के कार्यक्रम से जाने के बाद डॉ. संजीव मित्तल ने स्थिति को संभालने की कोशिश करते हुए कहा कि यह चूक जानबूझकर नहीं की गई थी। लेकिन चौधरी ने उनकी बातों पर भरोसा न करते हुए कहा कि ऐसे सरकारी आयोजनों में सामूहिक प्रयासों और मुख्यमंत्री के आशीर्वाद को प्रदर्शित करना सबसे महत्वपूर्ण होता है।
विधायक का पक्ष, किसी से नाराजगी नहीं
अपने समय से पहले कार्यक्रम छोड़ने पर सवाल किए जाने पर प्रियंका चौधरी ने कहा कि उन्होंने समारोह में पूरी तरह से भाग लिया और उनका जाना किसी नाराजगी का परिणाम नहीं था। बल्कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद लिया गया निर्णय था।
राजनीतिक प्रोटोकॉल की अहमियत पर प्रकाश
बाड़मेर का यह विवाद न केवल विधायक प्रियंका चौधरी के व्यक्तिगत असंतोष को दर्शाता है। बल्कि यह राजनीतिक प्रोटोकॉल के महत्व को भी उजागर करता है। यह घटना यह दिखाती है कि सार्वजनिक सेवा कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल का पालन कैसे न केवल अधिकारियों की गरिमा को बनाए रखता है। बल्कि कार्यक्रम की समग्र सफलता को भी सुनिश्चित करता है।
इस विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रोटोकॉल का पालन केवल औपचारिकता नहीं। बल्कि राजनीतिक परिपक्वता और सम्मान का प्रतीक है। बाड़मेर का यह रक्तदान शिविर मुख्यमंत्री के नेतृत्व का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया गया था। एक बार फिर राजनीतिक क्षेत्र में छोटी-छोटी औपचारिकताओं की बड़ी अहमियत को सामने लाया है।












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