SI पेपर लीक कांड में बड़ा खुलासा: पूर्व CM गहलोत के PSO व बेटे की गिरफ्तारी, कैसे खेला पूरा खेल?
Rajasthan SI paper leak 2021: राजस्थान में 2021 की सब-इंस्पेक्टर भर्ती, जो युवाओं के सपनों का दरवाजा खोलने वाली मानी जा रही थी, अब सत्ता के गलियारों में फैले एक संगठित रैकेट का प्रतीक बन गई है। ताजा घटनाक्रम में एसओजी ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) हैड कांस्टेबल राजकुमार यादव और उनके बेटे भरत यादव को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि पीएसओ ने अपने ही बेटे को पास कराने के लिए परीक्षा का पेपर खरीदना।
मीडिया की खबरों के अनुसार शनिवार देर रात हुई इस कार्रवाई में राजस्थान एसओजी की टीम सीधे जयपुर के उस पते पर पहुंची, जहां राजकुमार यादव मौजूद थे। साथ ही भरत यादव को भी हिरासत में लिया गया। शुरुआती पूछताछ में यह साफ हो गया कि भरत ने लिखित परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन फिजिकल टेस्ट में असफल रहा। यह सिर्फ व्यक्तिगत लाभ का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा था।

आरपीएससी सदस्य से लिया पेपर
राजकुमार यादव सिर्फ गहलोत के PSO ही नहीं, बल्कि कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय के भी सुरक्षा अधिकारी रह चुके थे। यही वह दौर था जब उनकी नज़दीकी मंत्री के निजी सचिव कुंदन कुमार पांड्या से हुई। पांड्या पर आरोप है कि उन्होंने आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा से पेपर हासिल कर, इसे चुनिंदा लोगों तक पहुंचाया, जिनमें एक नाम राजकुमार का था।
स्कूल से शुरू हुआ खेल
पेपर जयपुर में हसनपुरा के एक निजी स्कूल से लीक हुआ। वहां के प्रिंसिपल और परीक्षा अधीक्षक राजेश खंडेलवाल ने 10 लाख रुपए लेकर प्रश्नपत्र बाहर भेजा। एक युवक विवेक उर्फ यूनिक ने स्ट्रॉन्ग रूम से लिफाफा चीरकर फोटो निकाली और वॉट्सऐप पर भेज दी। यह तकनीकी और मानवीय लापरवाही का ऐसा संगम था, जिसने पूरे सिस्टम को चकमा दे दिया।
सरकार बदली, जांच बदली
साल 2023 में राजस्थान सरकार बदलने के बाद एसआईटी गठित की गई और मार्च 2024 से गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू हुआ। अब, राजकुमार यादव की गिरफ्तारी ने मामले को सीधे सत्ता के पूर्व गलियारों से जोड़ दिया है। राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है। क्या आने वाले दिनों में और बड़े नाम सामने आएंगे?
युवाओं के भरोसे पर चोट
859 पदों के लिए आयोजित राजस्थान पुलिस एसआई भर्ती 2021 में कुल 7.97 लाख उम्मीदवारों ने इस भर्ती के लिए आवेदन किया था। 3.80 लाख ने परीक्षा दी। हजारों युवाओं के सपनों से खेलना सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि एक पीढ़ी के विश्वास को तोड़ने जैसा है।












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