राजस्थान स्कूल हादसे के बाद शिक्षा मंत्रालय सख्त, सभी स्कूलों में सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य
राजस्थान के झालावाड़ जिले मनोहरथाना में सरकारी स्कूल बिल्डिंग गिरने और सात बच्चों की मौत के बाद शिक्षा मंत्रालय ने सख्त कदम उठाया है। मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी करते हुए बच्चों की सुरक्षा और मानसिक भलाई सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कार्रवाई करने को कहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही या चूक अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बता दें कि राजस्थान के झालावाड़ जिले में 25 जुलाई 2025 की सुबह सरकारी स्कूल भवन भरभराकर गिर गया। मलबे में दबने से 7 बच्चों की मौत हो गई जबकि करीब 30 बच्चे घायल हो गए। मृत बच्चों में मीना, उसका भाई कान्हा, कार्तिक, प्रियंका, कुंदन, पायल और हरीश शामिल थे। हादसे के बाद शिक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर गाइडलाइन और निर्देश जारी किए हैं।
हर स्कूल में सुरक्षा ऑडिट जरूरी
सभी स्कूलों और बच्चों व युवाओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले सार्वजनिक स्थलों में सुरक्षा ऑडिट कराना अनिवार्य किया गया है। इसके तहत भवन की संरचनात्मक मजबूती, फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकासी मार्ग और बिजली व्यवस्था की गहन जांच की जाएगी। यह ऑडिट राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों के अनुरूप किया जाएगा और इसकी रिपोर्ट संबंधित प्राधिकरण को सौंपनी होगी।
आपात स्थिति के लिए तैयार हों स्कूल और स्टाफ
मंत्रालय ने कहा है कि स्कूल स्टाफ और छात्रों को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। इसके अंतर्गत निकासी अभ्यास, प्राथमिक उपचार और सुरक्षा प्रोटोकॉल की ट्रेनिंग शामिल है। स्थानीय प्रशासन, एनडीएमए, दमकल विभाग, पुलिस और चिकित्सा एजेंसियों के साथ मिलकर समय-समय पर मॉक ड्रिल कराई जानी चाहिए।
बच्चों की मानसिक सेहत भी उतनी ही जरूरी
शारीरिक सुरक्षा के साथ-साथ छात्रों की मानसिक और भावनात्मक भलाई पर भी जोर दिया गया है। स्कूलों में काउंसलिंग सेवाएं, पीयर सपोर्ट सिस्टम और समुदाय आधारित सहयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को तनाव, भय या मानसिक दबाव से उबरने में मदद देना है।
24 घंटे में हो रिपोर्टिंग, जिम्मेदारी तय होगी
किसी भी संभावित खतरे, हादसे या "नजदीकी बचाव" की स्थिति की रिपोर्ट संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की प्राधिकृत इकाई को 24 घंटे के भीतर देना अनिवार्य होगा। रिपोर्टिंग में देरी, लापरवाही या कार्रवाई में चूक पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
आम जनता की भी है भूमिका
मंत्रालय ने अभिभावकों, समुदाय नेताओं और स्थानीय निकायों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और यदि कहीं भी बच्चों के लिए असुरक्षित हालात दिखें। चाहे वह स्कूल हो, सार्वजनिक स्थल हो या परिवहन साधन यदि कहीं भी खतरे की आशंका हो तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित प्राधिकरण को दें।












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