राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव पर सियासी जंग तेज, वन स्टेट-वन इलेक्शन बना सबसे बड़ा मुद्दा
राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं व शहरी निकाय चुनावों को लेकर सियासी जंग तेज हो गई है। एक ओर हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने जल्द चुनाव कार्यक्रम घोषित करने के संकेत दिए हैं, वहीं दूसरी ओर राजस्थान सरकार "वन स्टेट-वन इलेक्शन" की राह पर अडिग
नजर आ रही है। इस खींचतान से राजस्थान सरपंच चुनाव 2025 से पहले ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और पंचायत से लेकर नगर निगम स्तर तक की सत्ता के समीकरण दांव पर लग गए हैं।

सरकार की रणनीति: समय चाहिए, सुप्रीम कोर्ट विकल्प
राजस्थान के यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा का कहना है कि दिसंबर में ही निकाय चुनाव करवाने की तैयारी है। परिसीमन की अधिसूचना एक हफ्ते में जारी कर दी जाएगी। सरकार का तर्क है कि पंचायत चुनावों में सबसे बड़ी दिक्कत अलग-अलग कार्यकाल है, इसलिए सभी चुनाव एक साथ करवाना चुनौतीपूर्ण है। यही वजह है कि कानूनी राय लेने के बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।
आयोग का रुख: अलग-अलग कार्यकाल में वन स्टेट-वन इलेक्शन मुश्किल
राजस्थान निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने पहले ही स्पष्ट किया है कि पंचायतों का कार्यकाल अलग-अलग खत्म हो रहा है, इसलिए "वन स्टेट-वन इलेक्शन" व्यावहारिक नहीं है। आयोग हाई कोर्ट के आदेश पर अड़ा है और जल्द 150 निकायों व 11 हजार से ज्यादा पंचायतों में चुनावी बिगुल बजा सकता है।
राजनीतिक वार-पलटवार
मीडिया से बातचीत में खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने गहलोत सरकार पर हमला करते हुए कहा कि पिछली सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था को बिगाड़ा था। अब भाजपा सरकार समय पर चुनाव कराने और वन स्टेट-वन इलेक्शन लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। दूसरी ओर विपक्ष का आरोप है कि सरकार पंचायत चुनाव टालकर सत्ता पर पकड़ मजबूत करना चाहती है।
चुनावी समीकरण पर नजर
- जनवरी से मार्च 2025 तक 7 हजार से ज्यादा पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है।
- सितंबर-अक्टूबर में 3800 पंचायतों का कार्यकाल खत्म होगा।
- जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम का कार्यकाल नवंबर में पूरा होगा।
- 150 से ज्यादा निकायों और 8 नए जिलों में जिला परिषद गठन का इंतजार है।
बड़ा सवाल: टकराव सुलझेगा या और बढ़ेगा?
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार की "वन स्टेट-वन इलेक्शन" मुहिम कानूनी दांवपेंचों से आगे निकल पाएगी या चुनाव आयोग अपने रुख पर अड़ा रहकर टकराव और गहरा देगा।












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