राजस्थान लोकसभा चुनाव 2023: यहां बाप की, दादा की, मां की...सबकी प्रतिष्ठा लगी दांव पर
सियासत में कथनी व करनी में काफी अंतर है। इस ताजा उदाहरण लोकसभा चुनाव 2024 में राजस्थान की चार सीटें हैं। इन पर BJP-कांग्रेस ने परिवारवाद को बढ़ावा दिया है जबकि दोनों ही पार्टियों के नेता परिवारवाद के अक्सर बयान देने नजर आते हैं।
राजस्थान में लोकसभा की 25 सीट हैं। इस बार परिवारवाद के मामले में कांग्रेस पार्टी भाजपा से आगे हैं। कांग्रेस ने 3 परिवारों पर दांव लगाया है जबकि BJP ने एक परिवार पर। आलम यह है कि राजस्थान में बाप, दादा व मां की राजनीतिक प्रतिष्ठा के नाम पर भी वोट मांगे जा रहे हैं। इनमें से दो तो पूर्व सीएम के बेटे हैं।

दुष्यंत सिंह, झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र
झालावाड़ संसदीय सीट पर 35 साल से सिंधिया परिवार का कब्जा है। 1989 से 2004 तक वसुंधरा राजे सांसद चुनी गईं। फिर सीएम बनने पर यह सीट बेटे दुष्यंत सिंह को सौंप दी। साल 2004 से वसुंधरा राजे झालरापाटन से विधायक बन रहीं।
दुष्यंत भी तब से लगातार सांसद बनने आ रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में दुष्यंत सिंह के सामने कांग्रेस नेता प्रमोद जैन भाया की पत्नी उर्मिला जैन चुनाव लड़ रही है।
बृजेंद्र ओला, झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र
झुंझुनूं लोकसभा सीट पर वर्षों तक ओला परिवार का कब्जा रहा। साल 1996 से 2009 तक शीशराम ओला लगातार सांसद बनते आए। शीशराम ओला के निधन के बाद साल 2014 से यह सीट भाजपा के पास चली गई।
साल 2014 में संतोष अहलावत जीती और 2019 में नरेद्र कुमार। इस बीच कांग्रेस ने शीशराम ओला की पुत्रवधू राजबोला ओला को टिकट दिया। हालांकि वे हार गई थीं।
इस बार भाजपा के शुभकरण चौधरी के सामने शीशराम ओला के बेटे बृजेंद्र ओला हैं। बृजेंद्र ओला साल 2008 से लगातार झुंझुनूं MLA बनते आ रहे हैं। 1980, 1985 व 1993 में शीशराम ओला भी विधायक बने थे।
वैभव गहलोत, जालोर-सिरोही लोकसभा क्षेत्र
लोकसभा चुनाव 2024 में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया ही नहीं बल्कि अशोक गहलोत की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। गहलोत के बेटे वैभव गहलोत जालोर-सिरोही सीट से मैदान में हैं।
अशोक गहलोत ने पिछली बार भी वैभव गहलोत को जोधपुर से कांग्रेस सांसद बनाने की कोशिश की, मगर गजेंद्र सिंह शेखावत के सामने चुनाव हार गए।
बता दें कि अशोक गहलोत लगातार तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा 1980, 1984, 1991, 1996 व 1998 में जोधपुर सांसद भी रहे।
डॉ. ज्योति मिर्धा, नागौर लोकसभा क्षेत्र
राजस्थान की राजनीति में नागौर का मिर्धा परिवार काफी प्रसिद्ध है। नाथूराम मिर्धा, रामनिवास मिर्धा, भानूप्रताप मिर्धा वो शख्स हैं, जो साल 1971 से 1996 तक नागौर के सांसद रहे।
नाथूराम मिर्धा की पोती डॉ. ज्योति मिर्धा लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा की टिकट पर मैदान में हैं। इनके सामने कांग्रेस आरएलपी के उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल हैं।
ज्योति मिर्धा ने साल 2019 में भी चुनाव लड़ा था। हनुमान बेनीवाल के सामने हार गईं। 2009 में सांसद बनी थीं।
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