Rajasthan Exclusive: सचिन पायलट को ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर की नसीहत, "हम राष्ट्रहित में करते है काम"
Ground Report Rajasthan By-Election News: राजस्थान में 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को लेकर भाजपा-कांग्रेस के साथ अन्य पार्टियों ने जमीनी ताकत लगाना शुरू कर दी है। एक ओर कांग्रेस विधानसभा चुनावों के बाद लोकसभा चुनावों की जीत से उत्साहित और कार्यकर्ता जोश में है तो वहीं भाजपा गुटबाजी से अभी भी जूझ रही है।
विधानसभा उपचुनावों में कार्यकर्ताओं की गुटबाजी को दूर कर संगठित करने के लिए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से लेकर प्रदेश स्तरीय नेता लगातार सदस्यता अभियान को लेकर मंथन और सुलह करवाने की हर सम्भव कोशिश में लगे है।
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आज भी भजनलाल सरकार के ऊर्जा एवं टोंक जिले के प्रभारी मंत्री हीरालाल नागर ने उनियारा क्षेत्र में भाजपा नेताओं की बैठक ली और अलीगढ़ पंचायत समिति सभागार में घुमंतू परिवारों को आवासीय पट्टों का वितरण किया। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री नागर ने डॉक्टर किरोड़ी के बयानों पर सफाई भी दी।

मंत्री हीरालाल नागर ने डॉक्टर किरोड़ी लाल मीना के बिते दिन उनियारा के खेड़ली में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में दिए मीना समाज के लोगों को भाजपा नेताओं के परेशान करने के बयान को लेकर कहा कि वो हमारे सिनियर नेता है। उनका बयान मैने देखा नहीं है, मैं उसकों देखता हूं फिर जानकारी लेकर बताउंगा। बिना जानकारी के जवाब देना मेरे स्वभाव में नहीं है।
नेताओं के डराने के मीडिया के सवाल पर मंंत्री नागर ने कहा कि ऐसा कोन है जिसकों डरा सकते है आज, आज जनता कोई किसी से डरने वाली है क्या, कोई डरता है ना कोई डराता है, डराने-डरूने की बात है कि नहीं है मुझे मालूम नहीं है।
मंत्री नागर ने सचिन पायलट को नसीहत देते हुए कहा कि इनकों यह सोचना चाहिए कि जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशहित की सोचते है आप,हम सब लोग सामाजिक कार्यकर्ता है, आम आदमी है, यह क्या चाहेगा कि 5 साल में 10 बार चुनाव हो, जितना पैसा खर्च होता, कितनी बार आचार संहिता लगती है। कितने विकास के काम रूकते है, सचिन पायलट जी आप समझों कि इस देश को आप कहा ले जाना चाहते हो आप,
जनता में, कार्मिकों में यहीं भाव रहता है कि चुनाव होंगे, काम करने का किसी के मन में भाव नहीं रहता है। हमारी सरकार चाहती है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते है कि एक बार दो महीने में चुनाव हो जाए उसके बाद 5 साल काम ही करेंगे।
इसके बाद ना फिर आचार संहिता लगनी, ना कोई काम में व्यवधान आना है फिर काम का समय भी बढ़ेगा, क्रियान्विती भी बढेगी और सबसे बड़ी बात धन का खर्च भी कम होगा।
दोनों चुनाव एक साथ होंगे, फिर चाहे केंद्र के हो राज्य के हो, दो-दो बार चुनाव होते है, दो-दो बार साधन लगते है, जो खर्चा हो ता है ना वो देश का पैसा है, आमजन का पैसा है उसकी भी बचत होगी।
एक साथ चुनाव पहले भी हुए भी फिर होंगे तो देश का पैसा भी बचेगा, विकास भी होंगे और समय भी बचेगा। हम वो बात करते है जो देशहित में है। राजनीतिक महत्व की बात नहीं करते है।












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