Rajasthan Election: झुंझुनूं की 7 सीटों की तस्वीर साफ, जानिए बीजेपी-कांग्रेस की क्या है स्थिति?
Jhunjhunu Assembly Election: राजस्थान के रण में मुकाबला और कांटे की टक्कर का हो गया है। ऐसे में झुंझुनूं जिले की क्या स्थिति हैं, उसे लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। पीएम मोदी से लेकर कांग्रेस के दिग्गजों की यहां सभा हो चुकी हैं।
झुंझुनूं जिले की सात विधानसभा सीट पर इस बार कई अलग-अलग समीकरण सामने आ रहे हैं। सात में 3 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला बन रहा है। जबकि तीन पर भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर है। एक सीट पर चतुष्कोणीय मुकाबला देखा जा सकता है। झुंझुनूं, पिलानी व उदयपुरवाटी सीट पर तीसरा दल व निर्दलीय समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

ऐसे में झुंझुनूं जिले में किस पार्टी और किस प्रत्याशी की क्या स्थिति बन रही है। एक नजर इस पर डालते हैं।

मंडावा सीट से निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं खेल
मंडावा विधानसभा से कांग्रेस पार्टी से प्रत्याशी रीटा चौधरी और भाजपा के नरेंद्र कुमार खीचड़ के बीच चुनावी मुकाबला माना जा रहा है, हालांकि इस बार यहां से 12 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। बसपा से सदीक खान किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी डॉक्टर रामकृष्ण सुमन, राजपूत समाज से निर्दलीय प्रत्याशी दिलीप सिंह वाहिदपुरा व निर्दलीय सतीश आर्य अगर वोटो में सेंध मारते हैं तो भाजपा व कांग्रेस दोनों का नुकसान होना संभव है। वहीं इस सीट पर भाजपा भी दो गुटों में बंटी हुई नजर आ रही है। विधायक व प्रत्याशी रीटा चौधरी कांग्रेस की योजनाओं पर वोट मांग रही हैं। भाजपा केंद्र सरकार की नीतियों पर वोट मांग रहे हैं।

झुंझुनूं सीट पर रोचक होगा मुकाबला
झुंझुनूं सीट से भाजपा से बागी हुए राजेन्द्र भांबू निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। भांबू पिछला चुनाव भाजपा की टिकट पर लड़े थे। इस बार टिकट कट गई तो भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़ रहे हैं। यहां कांग्रेस से बृजेन्द्र ओला व भाजपा से बबलू चौधरी मैदान में हैं। भांबू के निर्दलीय मैदान में आने से मुकाबला रोचक हो गया है। बृजेन्द्र ओला जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। इस बार अल्पसंख्यक समुदाय की नाराजगी से चुनाव प्रभावित होते नजर आ रहे हैं। इस सीट पर भाजपा अब तक दो बार ही जीत दर्ज कर पाई है। माइनॉरिटी वोट की संख्या अच्छी खासी होने से भाजपा के लिए जीतना बहुत मुश्किल साबित होता है। राजेन्द्र भांबू को माइनॉरिटी वोटर्स के समर्थन की चर्चा से मुकाबला रोचक हो रहा है।

पिलानी में बागी ने बिगाड़ा खेल
भाजपा के पूर्व प्रत्याशी कैलाश मेघवाल ने टिकट कटने पर भाजपा से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा से दोनों चेहरे नए हैं। जो कि पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। मेघवाल के निर्दलीय चुनाव लड़ने से मुकाबला त्रिकोणीय में फंस गया है। मेघवाल भाजपा के दिग्गज नेता कैबिनेट मंत्री रहे काका सुंदरलाल के पुत्र है। इनका क्षेत्र में काफी प्रभाव रहा है। ऐसे में मुकाबला रोचक होगा। यहां कांग्रेस के उम्मीदवार पीतराम काला कांग्रेस के ही दो गुटों में फंस गए हैं।

उदयपुरवाटी में त्रिकोणीय मुकाबला
उदयपुवाटी से भाजपा-कांग्रेस और शिवसेना के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बन रहा है। कांग्रेस से बर्खास्त मंत्री राजेन्द्र गुढ़ा शिवसेना से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं भाजपा से पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी व कांग्रेस से भगवाना राम सैनी मैदान में हैं। ऐसे में तीसरा दल सीधे तौर पर उदयपुरवाटी सीट पर चुनाव को प्रभावित कर रहा है। उदयपुरवाटी की सीट जातीय समीकरण पर निर्भर करती है। उदयपुरवाटी में 2018 के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार वही हैं। दोनों ही पार्टियों ने जातीय समीकरण के हिसाब से टिकट दिए हैं। कांग्रेस ने माली को और भाजपा ने जाट को टिकट दिया है। उदयपुरवाटी में जाट और माली समाज के वोट सबसे ज्यादा हैं। दोनों जातियों के वोट अपनी अपनी जाति की उम्मीदवार को आते हैं तो मुकाबला काफी रोचक है। हार जीत का फैसला बहुत कम मार्जिन पर रहने की संभावना है।

खेतड़ी सीट सीट पर कड़ा
खेतड़ी सीट पर मुकाबला चतुष्कोणीय है। यहां भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरा दल व निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में होने से मुकाबला चार लोगों की तरफ बन रहा है। बसपा से मनोज घूमरिया मैदान में हैं। चर्चा है कि भाजपा-कांग्रेस की लड़ाई है। कोई तीसरा सीट पर कब्जा कर सकता है। वहीं पूर्व विधायक पूरणमल भी निर्दलीय मैदान में है। ऐसे में मुकाबला त्रिकोणीय से चौकोणीय बन रहा है। यहां कांग्रेस से मनीषा गुर्जर व भाजपा से पूर्व विधायक धर्मपाल गुर्जर मैदान में हैं।

नवलगढ़-सूरजगढ़ में सीधा मुकाबला
जिले की नवलगढ़ व सूरजगढ़ सीट पर कांग्रेस और भाजपा में सीधी टक्कर है। सूरजगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व विधायक श्रवण कुमार व भाजपा प्रत्याशी पूर्व सांसद संतोष अहलावत के बीच मुकाबला है। वहीं नवलगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार शर्मा व भाजपा प्रत्याशी विक्रम सिंह जाखल के बीच सीधा मुकाबला है। दोनों सीटों पर बराबर का मुकाबला है। जिसमें कोई भी बाजी मार सकता है यहां हार-जीत का मामूली ही अंतर रहने वाला है।
बात दें कि विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान 23 नवम्बर की शाम थम जाएगा। यानी प्रत्याशियों को प्रचार के लिए तीन दिन का समय बचा है, ऐसे में ज्यादातर उम्मीदवारों ने अपना प्रचार अभियान तेज कर दिया है। प्रत्याशी अब वार्ड एवं गांवों में नुक्कड़ सभा कर समर्थन जुटा रहे हैं। भाजपा एवं कांग्रेस अपने दिग्गज नेताओं को बुलाकर माहौल अपने- अपने पक्ष में करने में लगे हुए हैं।
संवाद सूत्र: जितेंद्र सिंह शेखावत, झुंझुनूं












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