Rajasthan By-Polls: राजस्थान में थम गया उपचुनाव के प्रचार का शोर, इन 7 सीटों पर 13 को मतदान, 23 को परिणाम
Rajasthan By-Polls: राजस्थान में सात विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार सोमवार की शाम को समाप्त हो गया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों ने मतदाताओं को रिझाने के लिए अपने अंतिम प्रयास कर लिए हैं। झुंझुनू, दौसा, देवली-उनियारा, खींवसर, चौरासी, सलूम्बर और रामगढ़ सीटों पर 13 नवंबर को मतदान होगा और 23 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे।
चुनाव प्रचार खत्म होते ही चुनाव रैली, रोड शो और चुनावी सभाओं पर पाबंदी लगा दी गई है। यह पाबंदी सोमवार शाम 6 बजे से शुरू हो गई है और मतदान के समापन तक यानी बुधवार शाम 6 बजे तक जारी रहेगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने बताया कि इस दौरान चुनाव आचार संहिता के अंतर्गत कड़े दिशानिर्देश लागू किए गए हैं।

मौन अवधि के दौरान प्रचार पर पाबंदी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन के अनुसार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 के अनुसार मौन अवधि के दौरान उम्मीदवार और उनके समर्थक केवल घर-घर जाकर प्रचार कर सकते हैं और मतदाताओं से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर सकते हैं। इसके अलावा चुनाव आयोग ने 20 नवंबर की शाम 6:30 बजे तक उपचुनाव के एग्जिट पोल के प्रसारण पर भी रोक लगा दी है।
भाजपा और कांग्रेस के अपने दावे
चुनाव प्रचार के अंतिम दिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वागड़ क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए जनजातीय समुदाय को ब्रेनवाशिंग गतिविधियों से सावधान रहने के लिए कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से ऐसे कार्य कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की जनता भाजपा की चुनावी सभाओं से दूर होती जा रही है और पार्टी को सातों सीटों पर हार का सामना करना पड़ेगा।
डोटासरा ने कहा कि राजस्थान में भाजपा सरकार का नेतृत्व करने वाले भजनलाल शर्मा सभी मोर्चों पर विफल रहे हैं। चाहे वह स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़कें, बिजली, पानी या कानून व्यवस्था का मुद्दा हो। उनकी सभाओं में कुर्सियां खाली पड़ी हैं।
सात सीटों पर उपचुनाव का कारण
उपचुनाव के लिए सात सीटों में से चार कांग्रेस के पास हैं। रामगढ़ सीट से कांग्रेस विधायक जुबैर खान और सलूम्बर सीट से भाजपा विधायक अमृतलाल मीणा के निधन के कारण इन सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। बाकी पांच सीटों के विधायक लोकसभा चुनावों में सांसद चुने गए। जिसके कारण इन सीटों पर उपचुनाव अनिवार्य हो गए। राजस्थान के इन उपचुनावों का नतीजा राज्य के आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।












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