'संविधान में उपमुख्यमंत्री जैसा कोई पद नहीं', डिप्टी CM दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा की नियुक्ति को चुनौती
Diya Kumari and Prem Chand Bairwa: राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। ये मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। जयपुर शहर के एक वकील ओम प्रकाश सोलंकी ने डिप्टी सीएम दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा के खिलाफ जनहित मुकदमा दायर किया है, जिसमें दावा किया गया है कि संविधान में इन पदों का कोई उल्लेख नहीं है।
अधिवक्ता ओम प्रकाश सोलंकी का कहना है, ''मैंने राजस्थान के उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। संविधान में उप मुख्यमंत्री पद का कोई उल्लेख नहीं है, यह सिर्फ एक राजनीतिक पद है और यह है असंवैधानिक।'' ओम प्रकाश सोलंकी ने शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए ये बातें कही है।

संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक, उप-प्रधानमंत्री भारत के उपराष्ट्रपति की तरह कोई संवैधानिक पद नहीं है बल्कि यह एक राजनीतिक पद है। उप-प्रधानमंत्री पद उस वक्त भारत में आया, जब 1947 में सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। इससे ही भारत में डिप्टी सीएम पद का विकास हुआ था।
खासकर अगर मुख्यमंत्री उपलब्ध नहीं है तो डिप्टी सीएम कैबिनेट बैठकों की अध्यक्षता कर सकते हैं और विधानसभा बहुमत का नेतृत्व कर सकते हैं। डिप्टी सीएम गोपनीयता की शपथ उसी के अनुरूप लेते हैं, जो मुख्यमंत्री लेते हैं।
प्रेमचंद बैरवा और दीया कुमारी ने शुक्रवार 15 दिसंबर 2023 को राजस्थान के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। कार्यभार संभालने के फौरन बाद दीया कुमारी ने कहा कि सरकार दी गई सभी 'जिम्मेदारियों' को बखूबी निभाने की कोशिश करेंगी। दीया कुमारी ने कहा, "राजस्थान के लोगों ने बीजेपी और पीएम मोदी पर अपना भरोसा जताया है, इसलिए हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है और हम इसे बखूबी निभाने की कोशिश करेंगे।"












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