राजस्थान के सियासी मैदान में अश्विनी वैष्णव संभोलेंगे नई जिम्मेदारी? ब्राह्मण महापंचायत के बाद बने नए समीकरण
राजस्थान में ब्राह्मण महापंचायत के बाद नए राजनीतिक समीकरण बन गए है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की चर्चा अब सीएम फेस में की जा रही है।

Rajasthan Ashwini Vaishnaw News: राजस्थान में चुनावी सरगर्मियां तेज होने लगी है। इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में एक तरफ जहां कांग्रेस से लेकर बीजेपी अपने अगले मुख्यमंत्री को लेकर रणनीति तैयार कर रही है। तो दूसरी तरफ हाल ही में जयपुर में आयोजित हुई ब्राह्मण महापंचायत में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के आने से राजस्थान की राजनीति में नए समीकरण बन गए हैं।
सीएम फेस के तौर पर अश्विनी वैष्णव की चर्चा
19 मार्च को आयोजित हुई ब्राह्मण समाज की महापंचायत से राजस्थान के अगले सीएम फेस के तौर पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को प्रोजेक्ट कर दिया गया है। रेल मंत्री भी अब उन नामों में शामिल हो गए हैं, जिनको राजस्थान के मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जा रहा है। जोधपुर में पैदा हुए 52 वर्षीय अश्विनी वैष्णव 1994 बैच के ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। जिनको जुलाई 2019 में ओडिशा से राज्यसभा सांसद के तौर पर चुना गया है।
राजस्थान में बने नए राजनीतिक समीकरण
ऐसे में महापंचायत में उनका भाषण और समाज के लोगों की लाखों की भीड़ ने राजस्थान को एक नया चेहरा दे दिया है। ब्राह्मण महापंचायत से अश्विनी वैष्णव की एंट्री से अब नए राजनीतिक समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। ब्राह्मण महापंचायत में रेल मंत्री बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। इसी के साथ उन्होंने भगवान परशुराम पर डाक टिकट भी जारी किया।
भाषण देकर छाए रेल मंत्री
महापंचायत को संबोधित करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने भाषण में साफ कहा कि मुझे सर या अश्विनी जी नहीं बल्कि अश्विनी भाई कहकर संबोधित करें। उन्होंने लोगों से एकता दिखाने की भी अपील की। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर कार्यक्रम का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें वह जय परशुराम के नारे लगाते नजर आ रहे हैं। ऐसे में अश्विनी वैष्णव ने हर किसी का ध्यान खींचा है, जिसके बाद प्रदेश बीजेपी गलियारों में नए नाम को चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
पीएम मोदी के भरोसेमंद अश्विनी वैष्णव
पीएम मोदी के अश्विनी वैष्णव भरोसेमंद हैं। यह बात इसलिए कही जा रही है कि क्योंकि 2021 में मोदी कैबिनेट के विस्तार में अश्विनी वैष्णव का शामिल होना एक चौंकाने वाला कदम था और उनको रेल मंत्रालय के साथ सूचना सूचना प्रौद्योगिकी जैसे अहम मंत्रालय देना इस बात पर भरोसा जताता है। अश्विनी वैष्णव पहले अटल बिहारी वाजपेयी के निजी सचिव भी रह चुके हैं।
राजस्थान में ब्राह्मणों का समीकरण
राजस्थान की आबादी में ब्राह्मणों का हिस्सा 7 से 7.5 प्रतिशत है। इसके अलावा राजस्थान के अधिकतर मुख्यमंत्री भी ब्राह्मण समाज से आए हैं। हालांकि अंतिम बार समाज से मुख्यमंत्री 33 साल पहले मिला था। गौर करने वाली बात यह भी है कि प्रदेश में ब्राह्मणों से ज्यादा जनसंख्या मुस्लिमों और जाट समाज की है, लेकिन जाट समाज से आजतक कोई मुख्यमंत्री नहीं बन पाया है, जबकि राजस्थान के पहले चार मुख्यमंत्रियों में से 3 ब्राह्मण थे। अंतिम ब्राह्मण मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी थे, जो 1990 तक तीन बार मुख्यमंत्री के पद पर रहे।
ब्राह्मण महापंचायत में उठी ये मांग
19 मार्च को जयपुर में ब्राह्मण महापंचायत के दौरान अगला सीएम ब्राह्मण समाज का हो, ऐसी मांग उठाई गई। इसी के साथ कांग्रेस-बीजेपी से विधानसभा चुनावों में 30-30 टिकट ब्राह्मणों को देने की मांग की गई। ईडब्ल्यूएस के तहत आनुपातिक आरक्षण की भी मांग की है। साथ ही कहा गया कि हिंदुओं के लिए भी धार्मिक बोर्ड बनाया जाए।












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