Rahul Bajaj : सीकर के काशी का बास गांव से जुड़ी हैं राहुल बजाज की जड़ें, 2011 में आए तब क्या कहा?
सीकर, 12 फरवरी। बजाज ग्रुप के चेयरमैन रहे भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति राहुल बजाज का शनिवार को निधन हो गए। लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे बजाज ने 83 साल की उम्र में पुणे में अंतिम सांस ली।

सीकर में भी शोक की लहर
राहुल बजाज का परिवार मूलरूप से राजस्थान के सीकर जिले के गांव काशी का बास का रहने वाला है। उनके निधन से सीकर में भी शोक की लहर दौड़ गई।

राहुल बजाज 2011 में आए थे काशी का बास
राहुल बजाज साल 2011 में पहली बार सीकर आए भी थे। तब उन्होंने लोगों से अपना परिचय देते हुए कहा था कि 'आप सभी जमनालाल बजाज को तो जानते हैं। मैं उनका पोता हूं'। राहुल बजाज काशी का बास आए तब पूरे गांव ने उनका जोरदार स्वागत किया था। महिलाओं ने मंगलगीत गाए थे।

जमनालाल बजाज को गांधी मानते थे पांचवां बेटा
बता दें कि राहुल बजाज के दादा जमनालाल बजाज का सीकर के काशी का बास गांव के गरीब परिवार में जन्म हुआ था। वे सिर्फ चौथी क्लास तक पढ़ पाए। उन्हें वर्धा के सेठ बछराज ने गोद लिया था। इसके बदले जमनालाल बजाज के परिवार ने गांव में एक कुआं बनवाने की मांग की थी। इसके बाद वे अपने नए परिवार के साथ ही रहे। जमनालाल बजाज को गांधी जी उन्हें अपना पांचवां बेटा कहते थे। राहुल बजाज पर भी जमनालाल बजाज का प्रभाव रहा।

राहुल बजाज का कोलकाता में हुआ जन्म
बता दें कि राहुल बजाज का जन्म कोलकाता में 10 जून 1938 में हुआ था। उनके पिता कमलनयन बजाज और मां सवित्री बजाज थीं। अपनी शुरुआती पढ़ाई कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से पूरी की। इसके बाद दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज ग्रेजुएशन की डिग्री ली। फिर राहुल बजाज ने मुंबई से लॉ और हावर्ड से एमबीए की डिग्री ली।
1965 में संभाली समूह की कमान
राहुल बजाज ने साल 1965 में बजाज समूह की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद 1980 के दशक में बजाज टू व्हीलर बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी रही। राहुल बजाज ने बजाज स्कूटर को घर-घर पहुंचाया तो उनके बेटे राजीव बजाज ने बजाज बाइक्स को नए मुकाम तक पहुंचाया।












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