VIDEO : पोखरण परमाणु परीक्षण का आंखों देखा हाल, जानिए 2 KM दूर के गांव खेतोलाई में क्या असर पड़ा?
जैलसमेर, 11 मई। आज का दिन भारत के लिए बेहद खास है। इस दिन पूरी दुनिया ने भारत की एटमी ताकत का लोहा माना था। 24 साल पहले यानी 11 मई 1998 को भारत-पाकिस्तान सीमा पर राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया था। यह दिन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

पोखरण परमाणु परीक्षण से जुड़े सवाल
पोकरण परमाणु परीक्षण को लेकर लोगों के जेहन में तमाम सवाल हमेशा रहते हैं? मसलन-पोखरण में ही परमाणु परीक्षण क्यों किया गया? परमाणु बम विस्फोट सबसे घातक होता है। ऐसे में पोखरण में परमाणु परीक्षण स्थल से लगते गांवों में इसका क्या असर पड़ा?

परीक्षण वाले दिन का आंखों देखा हाल
इन सारे सवालों के जवाब India Travels नाम के एक फेसबुक पेज पर 29 अप्रैल को पोखरण से किए गए लाइव वीडियो में मिलते हैं। वीडियो में पोखरण के एक स्थानीय वाशिंदे भागीरथ सिंह बिश्नोई ने परमाणु परीक्षण वाले दिन का आंखों देखा हाल बयां किया।

गांव खेतोलाई के भागीरथ सिंह बिश्नोई का इंटरव्यू
जैसलमेर में पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में परमाणु परीक्षण स्थल से दो किलोमीटर दूर स्थित गांव खेतोलाई के भागीरथ सिंह बिश्नोई कहते हैं कि उस समय भीषण गर्मी पड़ रही थी। तब हमारे घरों में आर्मी वाले आए थे। उन्होंने हमें कहा कि बड़ी चांदमारी या फायरिंग होने वाली है। इसलिए सभी गांव वाले अपने-अपने घरों से बाहर निकल जाओ। हम सब ग्रामीण दो घंटे तक अपने घरों से बाहर रहे थे। फिर गांव से पश्चिम दिशा में अचानक तेज धमाका हुआ और आसमां में धूआं उठता दिखा।
हिल गई थी खेतोलाई की जमीन, मकानों में आई दरारें
उस समय गांव के घर-घर में आर्मी के जवान पहुंच गए थे। गाड़ियों में सवार होकर और पैदल भी गांव की गली गली में घूम रहे थे। आर्मी के जवान ग्रामीणों से यही कह रहे थे कि घर से बाहर निकल जाएगा। किसी पर घर गिर जाएगा। नुकसान हो जाएगा। भागीरथ सिंह कहते हैं कि परमाणु परीक्षण के समय गांव खेतोलाई में कोई मकान गिरा नहीं बल्कि मकानों में दरारें आ गई थीं। भूकंप की तरह जोरदार कम्पन हुआ था। एक बारगी तो ग्रामीण घबरा गए थे।

बीस साल से आर्मी ने डाल रखा था डेरा
परमाणु परीक्षण के बारे में गांव वालों को पहले से जानकारी थी क्या? के सवाल भागीरथ सिंह ने कहा कि साल 1974 में भी यहां पर परमाणु परीक्षण हुआ था। उसके बाद लगातार बीस साल तक आर्मी ने पोखरण में डेरा डाल रखा था। ऐसे में ग्रामीणों को लगता था कि जरूर कुछ बड़ा होने वाला है, मगर परमाणु परीक्षण की जानकारी नहीं थी।

कार्य स्थल के नजदीक जाने की मनाही
भागीरथ सिंह कहते हैं कि फिर जब आर्मी के जवान गांव आकर ग्रामीणों को घरों से बाहर निकलने की कहने लगे तो हम समझ गए थे कि आर्मी का काम अब हो चुका है। शायद उनको परमाणु परीक्षणु के लिए हरी झंडी मिल गई होगी। हमें परमाणु परीक्षण का आभास हो गया था, क्योंकि हमें कार्य स्थल के नजदीक जाने की मनाही थी और पूर्व में भी यहां पर परमाणु परीक्षण हुआ था।
Today, on National Technology Day, we express gratitude to our brilliant scientists and their efforts that led to the successful Pokhran tests in 1998. We remember with pride the exemplary leadership of Atal Ji who showed outstanding political courage and statesmanship. pic.twitter.com/QZXcNvm6Pe
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2022
मकानों में पड़ीं दरारों का मिला मुआवजा
खेतोलाई गांवों के घरों में परमाणु परीक्षण की वजह से मकानों में दरारें आ गई थी, जिसका सरकार ने मुआवजा दिया था। परमाणु परीक्षण के बाद केंद्र सरकार के इंजीनियर खेतोलाई गांव आए थे और जांच के बाद हर घर को 20-20 हजार रुपए का मुआवजा दिया था।
परीक्षण स्थल पर चौबीस घंटे अब भी निगरानी
पोखरण में परमाणु परीक्षण हुए 24 साल बीत गए, मगर अभी तक ग्रामीणों को वहां जाने की अनुमति नहीं है। परमाणु परीक्षण स्थल के एक-दो किलोमीटर के दायरे में चारों तरफ आर्मी की पोस्ट हैं, जो परमाणु परीक्षण स्थल की निगरानी रखती है। वहां किसी को भी नहीं जाने दिया जाता। ग्रामीणों को भी मना कर रखा है कि बाहर से कोई आए तो उसे परमाणु परीक्षण स्थल पर नहीं लाए।

पोखरण में परमाणु परीक्षण क्यों हुआ?
इस सवाल के जवाब में भागीरथ सिंह पहली वजह बताते हैं कि यहां पर भूजल की कमी है। करीब एक हजार किलोमीटर तक जमीन में ग्रेनाइट पत्थर है। कहते हैं कि परमाणु परीक्षण में विस्फोट होता है। इसलिए उसके लिए ऐसी जगह उपयुक्त है, जो तेज कम्पन में अन्य जगहों की तुलना में अधिक मजबूत रहे। पोखरण की जमीन में दो सौ फीट तक नर्म मिट्टी है। फिर ग्रेनाइट आ जाएगा। यहां पर दो माह पहले ही तीन लाख रुपए नलकूप खुदवाया था। आठ फीट तक ग्रेनाइट आया। पानी नहीं आया।

पोखरण में बन गया था तालाब जैसा गड्ढा
परमाणु परीक्षण के बाद पोखरण में तालाब जितना बड़ा गड्ढा बन गया था। गड्ढा करीब तीन सौ फीट लंबा चौड़ा था। काफी गहरा भी था। गड्ढे में से मलबा बाहर निकल आया था। यहां पर परमाणु परीक्षण के पांच स्थल थे। दो बड़े परीक्षण खेतोलाई के पास व तीन अन्य जगह। भागीरथ सिंह कहते हैं कि पहले हमारे गांव को कोई नहीं जानता था।

खेतोलाई गांव पूरी दुनिया में चर्चा का विषय
परमाणु परीक्षण के बाद खेतोलाई गांव पूरी दुनिया में चर्चा का विषय रहा। जो हमारे लिए गर्व की बात है। तब विदेशी मीडिया भी गांव में आए। विदेशी पत्रकारों ने ग्रामीणों से कहा था कि हिरोशिमा नागासाकी परमाणु बम गिराए जाने पर जनजीवन पर काफी असर पड़ा था। अभी भी वहां विकलांग बच्चे पैदा हो रहे हैं। आपको भी सरकार को यहां परमाणु परीक्षण के लिए मना करना चाहिए।
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