राजस्थान की 3 विभूतियों को मिला पद्मश्री सम्मान, कौन हैं शीन काफ निज़ाम, बतूल बेगम व संत बैजनाथ महाराज?
Padma Shri 2025 Rajasthan: राजस्थान की सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर को समर्पित तीन जानी-मानी हस्तियों को इस वर्ष भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इन सम्मानित विभूतियों में मशहूर उर्दू शायर शीन काफ निज़ाम, मांड गायिकी की दिग्गज कलाकार बतूल बेगम, और जनसेवा में समर्पित संत बैजनाथ महाराज शामिल हैं।
शीन काफ निज़ाम उर्दू शायरी के क्षेत्र में एक बड़ा नाम है। उनकी शायरी में समकालीन संवेदनाओं और परंपरागत तहज़ीब का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है। उन्होंने उर्दू साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

बतूल बेगम, राजस्थान की पारंपरिक मांड गायिकी की शीर्ष गायिकाओं में से एक हैं। उन्होंने दशकों से इस लोक शैली को संरक्षित रखने का कार्य किया है और देश-विदेश में इसे लोकप्रिय बनाया है। उनकी गायकी में राजस्थान की आत्मा झलकती है।
बैजनाथ महाराज, समाज सेवा और आध्यात्मिक जागरण के लिए विख्यात हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए लगातार कार्य किया है। उनका जीवन समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा है।
शीन काफ़ निज़ाम (शिवकिशन बिस्सा)
जन्म: 26 नवंबर 1945, जोधपुर, राजस्थान
मूल नाम: शिवकिशन बिस्सा
शिक्षा: एम.ए. (उर्दू), पीएच.डी.
साहित्यिक योगदान
उर्दू शायरी में महत्वपूर्ण योगदान, विशेषकर ग़ज़ल और नज़्म विधाओं में। उनकी रचना "गुमशुदा दैर की गूंजती घंटियाँ" को 2010 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी शायरी में समकालीन संवेदनाएं और परंपरागत तहज़ीब का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार (2010) व पद्मश्री (2025)
बतूल बेगम
जन्म: केराप गाँव, डीडवाना ज़िला, राजस्थान
उपनाम: "भजनों की बेगम"
संगीत यात्रा: मांड और भजन गायन में माहिर, राजस्थान की लोक संगीत परंपरा की प्रमुख संवाहक। 8 वर्ष की आयु में केराप गाँव के ठाकुर जी मंदिर में भजन गाना शुरू किया। ढोल, ढोलक और तबला जैसे वाद्ययंत्रों में निपुण। भारत सहित 56 देशों में प्रस्तुति दी, जिनमें फ्रांस, जर्मनी, ट्यूनिशिया, इटली, स्विट्ज़रलैंड, अमेरिका और ब्रिटेन शामिल हैं।
सम्मान: नारी शक्ति पुरस्कार (2021) व पद्मश्री (2025)
संत बैजनाथ महाराज
राजस्थान के सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ के श्रद्धानाथ आश्रम के पीठाधीश्वर संत बैजनाथ महाराज ने साल 1935 में पनलावा गांव में जन्म लिया। श्रद्धानाथ महाराज के शिष्य बैजनाथ महाराज ने शिक्षा और अध्यात्म दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। साल 1960 से 1985 तक भारतीय विद्यापीठ कोठारी स्कूल में प्रिंसिपल के रूप में सेवाएं दीं। संत बैजनाथ महाराज राजस्थान के एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक गुरु और समाजसेवी हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका जीवन समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा है।
सम्मान: पद्मश्री (2025)
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