'राई' नृत्य को पहचान दिलाने वाले ने दुनिया को कहा अलविदा, कौन थे लोककला के मसीहा पद्मश्री राम सहाय पांडे?
Padma Shri Ram Sahay Panday: मध्य प्रदेश के लोक कला जगत के एक चमकते सितारे, राई नृत्य को मंचों और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने वाले पद्मश्री सम्मानित कलाकार राम सहाय पांडे अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनका जीवन एक ऐसे कलाकार की प्रेरणादायक कहानी है, जिसने समाज की बंदिशों को चुनौती दी और एक लोक नृत्य को गांव के आंगन से उठाकर विश्व पटल तक पहुंचाया।
92 वर्ष की उम्र में, उन्होंने मंगलवार सुबह सागर जिले के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे इस महान कलाकार के निधन से लोक कला प्रेमियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है। राम सहाय पांडे न सिर्फ एक कलाकार थे, बल्कि एक आंदोलन बन चुके थे, जिन्होंने राई नृत्य को नई पहचान दिलाई। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि जुनून और समर्पण से कोई भी कला दुनिया भर में सराही जा सकती है।

कौन थे राम सहाय पांडे?
बुंदेलखंड क्षेत्र के रहने वाले राम सहाय पांडे ने करीब 60 सालों तक राई लोक नृत्य को लोकप्रिय बनाया। उन्होंने इस पारंपरिक नृत्य को मृदंग की ताल के साथ मिलाकर नई पहचान दी। राई नृत्य आमतौर पर बेड़िया समुदाय से जुड़ा रहा है, लेकिन पांडे ने समाज की रूढ़ियों को तोड़ते हुए इसे मंच तक पहुंचाया।
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18 देशों में दीं 100 से ज्यादा प्रस्तुतियां
राम सहाय पांडे ने अपने जीवन में 18 देशों में 100 से ज्यादा प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने राई नृत्य को सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के कई हिस्सों में लोकप्रिय बनाया।
2022 में मिला पद्मश्री सम्मान
उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2022 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा। यह भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राम सहाय पांडे के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पांडे जी ने कठिन परिस्थितियों में भी कला के क्षेत्र को अपनाया और कई उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने राई नृत्य को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। राम सहाय पांडे अपने पीछे पत्नी और एक बेटे को छोड़ गए हैं। उनके निधन से लोक कला जगत में शोक की लहर है।
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