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नरपत सिंह राजपुरोहित : ये हैं नक्सलियों के लिए मौत का दूसरा नाम, पूरे राजस्थान को इनकी बहादुरी पर गर्व

बाड़मेर। नक्सलियों के मौत का दूसरा नाम हैं नरपतसिंह राजपुरोहित। इन्हें देखते ही नक्स​लवादियों की रूह कांप उठती है। राजस्थान के बाड़मेर जिले के ढोक निवासी नरपत सिंह राजपुरोहित सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के डिप्टी कमांडेंट हैं। इन्हें 26 जनवरी 2020 को नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में अदम्य साहस एवं पराक्रम के लिए राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया जाएगा।

अपनी बटालियन के हीरो हैं नरपत सिंह राजुरोहित

अपनी बटालियन के हीरो हैं नरपत सिंह राजुरोहित

बाड़मेर के बहादुर बेटे नरपतसिंह राजपुरोहित को राष्ट्रपति पुलिस पदक के साथ छह लाख रुपए नकद, इंदिरा गांधी नहर के द्वितीय चरण में 25 बीघा भूमि अथवा जमीन के एवज में चार लाख रुपए भी प्रदान किए जाएंगे। बाड़मेर के गांव ढोक निवासी नरपत सिंह राजपुरोहित अपनी बटालियन के हीरो माने जाते हैं। वर्तमान ये झारखंड के नक्सलवाद से प्रभावित इलाकों में तैनात हैं कुछ समय पहले इन्होंने अपनी जान को जोखिम में डालकर आठ नक्सलियों को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया था। झारखंड एवं ओडिशा के नक्सलवाद से प्रभावित इलाकों में नरपत सिंह के ख़ौफ़ से माओवादी समर्पण कर रहे हैं या फिर वे इलाका ही छोड़ रहे हैं।

 राजपुरोहित​ की टीम ने कई नक्सली मार गिराए

राजपुरोहित​ की टीम ने कई नक्सली मार गिराए

एसएसबी की 18वीं वाहिनी में तैनात नरपतसिंह के उच्च अधिकारी भी उनकी कार्यशैली के कायल हैं। इस बहादुर की देश सेवा के जज्बे को लेकर तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इन्हें सम्मानित किया था। नरपतसिंह हैं कि नक्सलवादियों का सबसे बड़ा हथियार गुरिल्ला युद्ध है, लेकिन एसएसबी उसका मुंहतोड़ जवाब देती है। नरपतसिंह की टीम ने न केवल कई नक्सलवादियों को मार गिराया बल्कि अब तक 8 हार्डकोर नक्सलियों को पकड़ भी चुकी है।

 20 नक्सलियों को किया डटकर सामना

20 नक्सलियों को किया डटकर सामना

बता दें कि नरपत सिंह राजपुरोहित ने 28 जुलाई 2018 को दुमका में अपने 10 जवानों के साथ एक ऑपरेशन को लीड करते हुए 2007 से सक्रिय नक्सली दसनाथ देहरी और अनुज पहाड़िया को करीब घंटे तक की मुठभेड़ के बाद मार गिराया था। 20 नक्सलियों का बहादुरी से मुकाबला किया था।

2012 में ज्वाइन की एसएसबी

2012 में ज्वाइन की एसएसबी

सेंट्रल गवर्नमेंट के द्वारा वीरता पदक मिलने के बाद तीन हजार की राशि पदक विजेता को प्रति माह के साथ रेलवे में द्वितीय श्रेणी एसी निशुल्क और सरकारी एयरलाइंस में रियायत मिलती है। गौरतलब है कि वर्ष 2012 में नरपत सिंह राजपुरोहित ने एसएसबी बतौर असिस्टेंट कमांडेंट ज्वाइन की थी। जवाहर नवोदय विद्यालय पचपदरा बाड़मेर से पढ़ाई की। डीयू खालसा कॉलेज दिल्ली से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

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