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Naresh Meena Full Story: जन्म से लेकर 240 दिन बाद जेल से रिहाई, नरेश मीणा ने SDM को क्यों मारा था थप्पड़?

Naresh Meena News: नरेश मीणा आज 14 जुलाई 2025 को जेल से रिहा हो रहे हैं। वे राजस्थान के चर्चित एसडीएम थप्पड़ कांड में 240 दिन से जेल में बंद थे। उनकी रिहाई से समर्थकों में खुशी की लहर है। 11 जुलाई को राजस्थान हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी।

कौन हैं नरेश मीणा? उन्होंने एसडीएम अमित कुमार चौधरी को कब और क्यों मारा थप्पड़? वे भाजपा या कांग्रेस में से किस पार्टी के बागी हैं? देवली-उनियारा उपचुनाव में उनका प्रदर्शन कैसा रहा? आइए जानते हैं जन्म से लेकर जेल और रिहाई तक उनकी पूरी कहानी।

Naresh Meena Full Story
Naresh Meena Bail पर बड़ा अपडेट, एसडीएम का थप्‍पड़ मारने वाले 'नेताजी' अब जेल से बाहर आएंगे या नहीं?

शुरुआत: नयागांव से छात्र राजनीति तक

नरेश मीणा का जन्म 16 अगस्त 1976 को राजस्थान के बारां जिले की अटरू तहसील के गांव नयागांव, पोस्ट ननावता में हुआ। उनके पिता कल्याण सिंह 30 वर्षों तक गांव के सरपंच रहे, वर्तमान में उनकी मां सरपंच हैं और पत्नी सुनीता जिला परिषद सदस्य हैं।

नरेश मीणा ने जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय से शिक्षा ली। इसी दौरान वे छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए और 'छोटा किरोड़ी' के नाम से पहचान बनाने लगे।

कांग्रेस से नजदीकी, बगावत और चुनावी संघर्ष

छात्र जीवन में आंदोलनों के दौरान करीब दो दर्जन केस दर्ज हुए। इसी दौरान वे कांग्रेस के संपर्क में आए और सचिन पायलट के करीबी माने जाने लगे।

छबड़ा से चुनाव: 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया। नरेश मीणा ने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा और 43,921 वोट हासिल किए। भाजपा के प्रताप सिंह सिंघवी 65,000 वोटों से जीते।

दौसा लोकसभा टिकट विवाद: 2024 में दौसा से लोकसभा टिकट मांगी, लेकिन कांग्रेस ने मुरारी लाल मीणा को चुना। नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय लड़ने की घोषणा की, मगर अंत में मैदान में नहीं उतरे।

देवली-उनियारा उपचुनाव: टोंक-सवाई माधोपुर से कांग्रेस विधायक हरीश मीणा सांसद बने, जिससे सीट खाली हुई। यहां भी नरेश मीणा को कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 59,478 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। भाजपा के राजेंद्र गुर्जर 1,00,599 वोटों से विजयी रहे।

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थप्पड़कांड: कब, कहां और क्यों हुआ विवाद?

13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान टोंक जिले के गांव सामरावता में मतदाताओं ने चुनाव बहिष्कार कर रखा था। टोंक जिला कलेक्टर सौम्या झा के निर्देश पर आरएएस अधिकारी और मालपुरा एसडीएम अमित कुमार चौधरी गांव पहुंचे।

यहां निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा और एसडीएम के बीच तीखी बहस हो गई और नरेश मीणा ने कथित तौर पर एसडीएम को थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए-समर्थकों ने तोड़फोड़ और आगजनी की। उसी रात पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और तब से वे जेल में थे।

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जमानत, रिहाई और अब आगे की तैयारी

कोर्ट में दो बार जमानत अर्जी खारिज होने के बाद 11 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने उन्हें ज़मानत दी। उनकी रिहाई के बाद समर्थकों में उत्साह है। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा:

"सत्यमेव जयते...! आज माननीय हाईकोर्ट ने मुझे 240 दिन जेल में रहने के बाद जमानत दी है. इस दौरान जितने भी शुभचिंतकों ने मेरा, समरावता गाँव वासियों और जेल में बंद रहे अन्य साथियों का न्याय की लड़ाई में साथ दिया, उन सभी का तहेदिल से धन्यवाद!"

बताया जा रहा है कि जेल से बाहर आने के बाद वे सबसे पहले सामरावता गांव जाएंगे।

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