Taiwan Crisis: 'किसी भी वक्त ताइवान पर हमला कर सकता है China’, Trump के एडवाइजर ने कर दी प्लानिंग लीक!
Taiwan Crisis: डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में चीन की यात्रा पर गए थे जो 15 मई को पूरी हो गई। इस यात्रा से अमेरिका का हासिल क्या रहा ये तो ठीक ढंग से सामने नहीं आया लेकिन एक चिंता अमेरिका ने पूरी दुनिया में छोड़ दी है। दरअसल एक खबर ट्रंप के करीबी एडवाइजर ने बता जिसमें मुताबिक अगले पांच सालों में चीन ताइवान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। Axios ने 17 मई को छापी एक रिपोर्ट में इसका दावा भी किया है।
साथ ही ट्रंप के करीबी सहयोगियों का मानना है कि चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping चीन को ऐसी स्थिति में देखना चाहते हैं जहां वह खुद को अमेरिका के बराबर सुपरपावर घोषित कर सके और साथ ही ताइवान पर अपना दावा भी पूरी तरह स्थापित कर दे।

क्या चाहते हैं शी जिनपिंग?
रिपोर्ट के मुताबिक, शी जिनपिंग की सोच सिर्फ आर्थिक ताकत तक सीमित नहीं है। वह चीन को दुनिया के सामने ऐसी ताकत के रूप में पेश करना चाहते हैं जो अमेरिका के बराबर खड़ी हो सके। इसी संदर्भ में ताइवान उनके लिए सिर्फ एक द्वीप नहीं बल्कि चीन की राष्ट्रीय एकता और शक्ति प्रदर्शन का बड़ा सिंबल बन चुका है। ट्रंप के करीबी सूत्र ने Axios को बताया कि शी जिनपिंग चीन को इस स्थिति में देखना चाहते हैं कि वह कह सके, “हम अब उभरती हुई शक्ति नहीं हैं, बल्कि अमेरिका के बराबर हैं और ताइवान हमारा है।” जिसकी झलक ट्रंप के दौरे में भी दिखी जब चीन ने कहा था कि "अगर इस मुद्दे को ठीक से नहीं संभाला गया तो दोनों देशों में टकराव भी हो सकता है।”
बाहर दोस्ती, अंदर तनाव
अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन के दौरान माहौल काफी दोस्ताना दिखा। राष्ट्रपति Donald Trump चीन के भव्य स्वागत और आतिथ्य से खुश नजर आए। वहीं शी जिनपिंग ने भी पूरी कोशिश की कि दोनों देशों के बीच माहौल सकारात्मक दिखाई दे। लेकिन पर्दे के पीछे स्थिति उतनी आसान नहीं थी।
ट्रंप के बयान से बढ़ा विवाद
15 मई को Fox News को दिए गए इंटरव्यू में ट्रंप ने एक ऐसा बयान दिया जिसने विवाद और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि ताइवान को हथियार बेचना एक अच्छा सौदेबाजी का हथियार हो सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका चाहे तो ताइवान को हथियार बेच सकता है और चाहे तो नहीं भी बेच सकता।
ट्रंप की बात से क्यों मचा हंगामा?
ट्रंप के इस बयान ने इसलिए ज्यादा हलचल पैदा की क्योंकि उनके प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी पहले यह कह चुके थे कि अमेरिका की ताइवान नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। ऐसे में ट्रंप का बयान अमेरिकी नीति में संभावित बदलाव के संकेत की तरह देखा जाने लगा। इससे ताइवान और अमेरिका दोनों जगह राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।
ताइवान ने क्या कहा?
ताइवान के राष्ट्रपति Lai Ching-te ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ताइवान और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग और हथियारों की बिक्री इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, यही सहयोग चीन के बढ़ते दबाव के खिलाफ संतुलन बनाए रखता है।
अमेरिका ने संभालने की कोशिश की स्थिति
विवाद बढ़ने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने ABC News को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका की ताइवान नीति में “कोई बदलाव नहीं” हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और चीन के बीच स्थिर संबंध बनाए रखना बेहद जरूरी है।
अगले 5 साल क्यों माने जा रहे अहम?
अमेरिकी रणनीतिक हलकों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि अगले पांच साल एशिया की राजनीति के लिए बेहद अहम हो सकते हैं। चीन लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है और ताइवान के आसपास सैन्य गतिविधियां भी तेज हुई हैं। ऐसे में अमेरिका को डर है कि बीजिंग भविष्य में ताइवान को लेकर ज्यादा आक्रामक रुख अपना सकता है।
दुनिया की नजर अब ताइवान पर
अमेरिका, चीन और ताइवान के बीच बढ़ता यह तनाव सिर्फ क्षेत्रीय मामला नहीं रह गया है। इसका असर वैश्विक राजनीति, व्यापार, टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले महीनों में वॉशिंगटन, बीजिंग और ताइपे के रिश्ते किस दिशा में जाते हैं।
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