वसुंधरा में हिम्मत होती तो खुद का नाम बोल पर्ची मुंह में खा लेती, सांसद हनुमान बेनीवाल ने क्यों कही यह बात
Rajasthan News: राजस्थान विधानसभा के उपचुनावों के दौरान नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल के बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। हनुमान बेनीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर तंज कसते हुए भाजपा की नेतृत्व चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उन्होंने एक दिलचस्प घटना का जिक्र किया। जिसमें वसुंधरा राजे को स्लिप चीफ मिनिस्टर कहा और बताया कि कैसे राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री चयन के समय वसुंधरा को एक पर्ची दी थी। जिस पर भजनलाल शर्मा का नाम लिखा था। बेनीवाल के अनुसार इस पर्ची के आधार पर उन्होंने मुख्यमंत्री पद हासिल किया था। इस घटना से भाजपा के भीतर चल रही आंतरिक राजनीति और नेतृत्व चयन की प्रक्रिया पर बेनीवाल ने कई सवाल खड़े किए हैं।
हनुमान बेनीवाल के संघर्ष पर दिखेगा असर
इसके साथ ही हनुमान बेनीवाल ने खींवसर में एक चुनावी रैली में भाजपा की हार को महत्वहीन बताते हुए अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की संभावित हार के नतीजों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आरएलपी की हार का मतलब न केवल उनके संघर्ष का अंत होगा। बल्कि आम लोगों के हक की लड़ाई कमजोर होगी। जो वे पिछले दो दशकों से लड़ रहे हैं।

इस चुनाव में अपनी पत्नी को उम्मीदवार बनाकर हनुमान बेनीवाल ने एक रणनीतिक चाल चली है। जो उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने अपने भाषण में वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत दोनों पर हमला किया। जिससे स्पष्ट होता है कि उनकी लड़ाई सिर्फ एक सीट के लिए नहीं है। बल्कि एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा है।
उपचुनाव बन गया है विचारधाराओं की लड़ाई का मैदान
राजस्थान विधानसभा उपचुनाव अब सिर्फ दलों की जीत-हार की बात नहीं रह गई है। बल्कि यह व्यक्तिगत विचारधाराओं और नेतृत्व चयन के तरीकों की भी परीक्षा बन गया है। हनुमान बेनीवाल के बयान और रणनीति राज्य की राजनीति में छिपी जटिलताओं को उजागर करती हैं। जो इस चुनाव को सभी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बना रही हैं।












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