• search
राजस्थान न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

खाटू मेला इतिहास: बुजुर्ग मुस्लिम खुदाबख्श सजाते हैं रथ, फिर नगर भ्रमण करते हैं बाबा श्याम

|

Khatushyamji News, खाटूश्यामजी। सीकर जिले में इस समय बाबा श्याम का फाल्गुन लक्खी मेला परवान है। खाटू की ओर जाने वाले हर रास्ते से श्याम भक्त मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं। एकादशी का बाबा श्याम सजे-धजे रथ में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। खास बात यह है कि खाटूश्यामजी का यह रथ कई सालों से मुस्लिम खुदाबक्श सजाते आ रहे हैं। श्याम रथ (Baba Shyam Ka Rath) का लाइसेंस भी खुदाबक्श के नाम से बना हुआ है।

Muslim khadabakhsh decorated rath of baba shyam in Khatu Mela

राजस्थान के सीकर जिले में एक छोटा सा कस्बा है खाटू। आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से ही भले ही यह कस्बा छोटा हो, मगर यहां से दुनियाभर के लोगों की श्रद्धा जुड़ी हुई है। आस्था की डोर के सहारे लाखों श्याम दीवाने खाटू खींचे चले आते हैं और हारे के सहारे बाबा श्याम के दरबार में धोक लगाकर निहाल हो उठते हैं।

Khatu Mela History in Hindi

खाटूश्यामजी के फाल्गुन लक्खी मेले में तो आस्था का सैलाब उमड़ता है। महज दस दिन में ही श्याम भक्तों का आंकड़ा बीस लाख के पार पहुंच जाता है। खाटू मेले में आने वाले अधिकांश श्याम भक्तों हाथों में बाबा श्याम का निशान होता है। यूं तो बाबा श्याम को भक्त सालभर निशान चढ़ाते रहते हैं, मगर फाल्गुन लक्खी मेले में एक साथ लाखों निशान चढ़ाए जाते हैं। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल उठता होगा कि आखिर इतने सारे निशान का क्या किया जाता होगा?

Khatu Mela : फाल्गुन लक्खी मेले खाटूश्यामजी को चढ़ने वाले लाखों निशान बाद में आते हैं इस काम

खाटूधाम में चढ़ाए जाने वाले प्रत्येक निशान (Khatu Nishan) को सहेज कर रखा जाता है। इसके लिए श्री श्याम मंदिर समिति खाटूश्यामजी की ओर से बाकायदा व्यवस्था की हुई है। सभी निशान को मंदिर परिसर के पास ही सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है और फाल्गुन लक्खी मेले (Khatu Falgun Lakhi Mela) की समाप्ति के बाद इन निशान से श्याम दुप्पटे बनाए जाते हैं, जो सालभर तक खाटूश्यामजी आने वाले श्याम भक्तों को भेंट किए जाते हैं।

Khatu Mela: 350 साल से खाटू के शिखर पर इसलिए लहराता है सिर्फ सूरजगढ़ का निशान

यूं तो बाबा श्याम के दरबार में लाखों निशान चढ़ाए जाते हैं, मगर इन सबमें राजस्थान के झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ का निशान बेहद खास है। वजह यह है कि सूरजगढ़ का ही निशान (Surajgarh Nishan) बाबा श्याम के शिखर पर लगाया जाता है, जो सालभर लहराता है। किदवंती है कि करीब 350 साल पहले बाबा श्याम के मंदिर में निशान चढ़ाने आए श्याम भक्तों में होड़ मच गई थी कि उनका निशान बाबा श्याम के शिखर पर लगे।

फिर सहमति बनी कि जो श्याम भक्त बंद मंदिर का ताला मोरछड़ी से खोलेगा, उसी का निशान शिखर पर चढ़ेगा। सूरजगढ़ से निशान लेकर श्याम भक्त मंगलाराम मोरछड़ी से ताला खोलने में सफल रहे थे तब से खाटूश्यामजी मंदिर (Khatushyamji temple in Sikar) के शिखर पर सूरजगढ़ का ही निशान चढ़ता आ रहा है। मंगलाराम के निधन के बाद उनके परिवार व सूरजगढ़ के लोग इस परम्परा को निभा रहे हैं।

KhatuShyamJi: सरहद पार भी गूंजते हैं बाबा श्याम के जयकारे, पाकिस्तान के इन तीन शहरों में श्याम मंदिर

राजस्थान के सीकर जिले के खाटूधाम में बाबा श्याम का फाल्गुन लक्खी मेला परवान पर है। दस मार्च से शुरू यह मेला होली तक चलेगा। बता दें कि बाबा श्याम की महिमा अपरम्पार है और इस बात का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि दुश्मन देश पाकिस्तान में भी खाटूश्यामजी (Baba Shyam In Pakistan) विराजमान है। पाकिस्तान के हैदराबाद, कराची और पसनी में खाटूश्यामजी के मंदिर हैं। तीनों ही जगहों मेले भी भरते हैं। कराची के रणछोड़ शहर में स्थित श्याम मंदिर के पुजारी प्रदीप एडिवाल, हैदराबाद में श्याम मंदिर के पुजारी आशानंद श्याम और पसनी में श्याम मंदिर के पुजारी किशोर हैं। खास बात यह है कि पाकिस्तान स्थित श्याम मंदिरों के मेले के दौरान रथयात्रा भी निकाली जाती है।

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Muslim khadabakhsh decorated rath of baba shyam in Khatu Mela
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more