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Mewar Royal Family Dispute: महाराणा प्रताप के वंशजों के विवाद की पूरी कहानी, दादा की लड़ाई पोतों तक पहुंची

Mewar Royal Family Dispute Udaipur: राजस्‍थान में महाराणा प्रताप के वंशज और मेवाड़ के राजघराने के राजकुमार एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार मेवाड़ रॉयल फैमिली का विवाद सड़क पर आ गया। विश्‍वराज सिंह मेवाड़ को राज तिलक की परंपरा निभाने के लिए उदयपुर के सिटी पैलेस के गेट तक बंद कर दिए। पथराव व तोड़फोड़ तक की नौबत आ गई।

यह भी पढ़ें-भाजपा MP महिमा कुमारी के पति की उदयपुर के सिटी पैलेस में No Entry, गद्दी पर बैठने के बाद बवाल क्‍यों?

Mewar Royal Family Dispute Story

सबसे पहले जानिए उदयपुर सिटी पैलेस में बवाल क्‍यों मचा?

चित्‍तौड़गढ़ में राजतिलक: पूर्व सांसद महेंद्र सिंह मेवाड़ का 10 नवंबर को निधन हो गया था। इस पर नाथद्वारा से भाजपा विधायक व उनके बेटे विश्‍वराज सिंह मेवाड़ 25 नवंबर को 2024 सुबह चितौड़गढ़ में महेंद्र सिंह मेवाड़ के 77वें उत्‍तराधिकारी के तौर पर विश्‍वराजसिंह मेवाड़ का राजतिलक दस्‍तूर हुआ।

उदयपुर सिटी पैलेस में प्रवेश नहीं: राजतिलक के बाद विश्‍वराज सिंह मेवाड़ राजपरिवार की पंरपरा के उदयपुर सिटी पैलेस में धुणी माता के दर्शन करने पहुंचे। सिटी पैलेस विश्‍वराजसिंह मेवाड़ के चाचा अरविंद सिंह मेवाड़ व उनके बेटे लक्ष्‍यराज सिंह मेवाड़ के पास है। अरविंद सिंह मेवाड़ ने सिटी पैलेस के दरवाजे बंद कर दिए और विश्‍वराजसिंह मेवाड़ को प्रवेश नहीं करने दिया।

1955 से शुरू हुआ मेवाड़ राजपरिवार विवाद

  • उदयपुर सिटी पैलेस में 25 नवंबर 2024 को मचे बवाल के पीछे मेवाड़ राजपरिवार को संपत्ति विवाद है, जो साल 1955 में शुरू हुआ और अब तक चल रहा है। मतलब दादा की लड़ाई अब पोतों तक आ पहुंची हैं।
  • दरअसल, साल 1955 में भगवंत सिंह मेवाड़ के महाराणा बने थे। उनके दो बेटे थे महेंद्र सिंह व अरविंद सिंह। महाराणा बनने के बाद भगवंत सिंह ने मेवाड़ में अपनी पैतृक संपत्तियों को बेचना या लीज पर देना शुरू किया था।

  • पैतृक संपत्तियों को बेचना या लीज पर देने की बात भगवंत सिंह के बड़े बेटे महेंद्र सिंह को पसंद नहीं आई तो वे उनसे नाराज हो गए और पैतृक संपत्तियों को हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत बांटने की मांग की। अपने पिता के खिलाफ केस तक दायर कर दिया।
  • इसके बाद भगवंत सिंह ने 15 मई 1984 को अपनी वसीयत में छोटे बेटे अरविंद सिंह को संपत्तियों का एक्ज्यूक्यूटर बना दिया। साथ ही महेंद्र सिंह को ट्रस्ट और संपत्ति से बेदखल कर दिया गया। 3 नवंबर 1984 को भगवंत सिंह का निधन हो गया था।
  • भगवंत सिंह के बेटे महेंद्र सिंह व अरविंद सिंह के परिवार के बीच 1984 से संपत्ति विवाद चल रहा था। अब यही विवाद महेंद्र सिंह बेटे विश्‍वराज सिंह और अरविंद सिंह के बेटे लक्ष्‍यराज सिंह तक पहुंच गया।

क्‍या है धूणी दर्शन की परंपरा?

मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश के बारे में परंपरा बताई जाती है कि जब भी किसी नए महाराणा का राजतिलक होता है, उसके बाद उदयपुर के सिटी पैलेस में धूणी माता के दर्शन की परंपरा निभाई जाती है। फिर महाराणा को एकलिंग जी मंदिर में भी दर्शन करने होते हैं। चित्‍तौड़गढ़ में राजतिलक की रस्म के बाद विश्वराज सिंह मेवाड़ भी धूणी दर्शन और एकलिंग मंदिर जाने के लिए मेवाड़ सिटी पैलेस पहुंचे थे, लेकिन उन्हें सिटी पैलेस में घुसने से रोक दिया गया।

सिटी पैलेस उदयपुर में घुसने से इसलिए रोका

मेवाड़ राजपरिवार के संपत्ति विवाद के बीच विश्‍वराज सिंह मेवाड़ के राजतिलक (दस्‍तूर) कार्यक्रम के बाद एकलिंग नाथ मंदिर व धुणी माता के दर्शनों के लिए उदयपुर में सिटी पैलेस में आने के खिलाफ अरविंद सिंह मेवाड़ के परिवार ने सार्वजनिक नोटिस तक जारी कर रखा था। मीडिया की खबरों के अनुसार अरविंद सिंह मेवाड़ व उनके बेटे लक्ष्‍यराज सिंह मेवाड़ ने विश्‍वराज सिंह मेवाड़ के दस्‍तूर कार्यकम को गैरकानूनी बताया। अरविंद सिंह मेवाड़ ने तो यहां तक कहा कि 'मेवाड़ राजघराना एक ट्रस्ट के जरिए चलता है, जिसका संचालन उनके पिता ने उन्हें दे रखा है। ऐसे में राजगद्दी का अधिकार मेरे और मेरे बेटे (लक्ष्यराज सिंह) का है।'

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