Sitendra Singh: 23 की उम्र में शहीद हुए सितेंद्र सिंह को अंतिम विदाई, मां की पुकार-'मुझे मेरा लाल चाहिए'
Sitendra Singh Sankhala INS: महज 23 साल की उम्र में वीरगति को प्राप्त हुए सितेंद्र सिंह सांखला को गुरुवार दोपहर को उनके पैतृक गांव डांगर (झुंझुनूं जिला) में अंतिम विदाई दी गई। शहीद सितेंद्र सिंह के अंतिम दर्शन करने पूरा गांव उमड़ पड़ा।
सितेंद्र सिंह सांखला 21 जुलाई को मुम्बई में भारतीय नौसेना के जंग जहाज INS ब्रह्मपुत्र पर आग लगने से शहीद हो गए थे। सांखला मूलरूप से राजस्थान के झुंझुनूं जिले की सूरजगढ़ तहसील के गांव डांगर के रहने वाले थे।

गुरुवार सुबह से परिजन और पूरा गांव बहादुर शहीद बेटे सितेंद्र सिंह सांखला की पार्थिव देह का इंतजार कर रहा था। एक तरफ नानी तो दूसरी और दादी भी अपने जिगर के टुकड़े की आखिरी झलक पाने को बेताब थीं।
मां प्रेम देवी बेटे के शहादत की खबर सुनकर बेसुध हो गई थी। विलाप करती मां को देख वहां मौजूद कोई भी शख्स आंसू नहीं रोक पाया था। रोते-रोते मां बार-बार बस यही बोले जा रही थी कि 'मुझे मेरा लाल चाहिए।'
शहीद सितेंद्र सिंह सांखला की पार्थिव देह दोपहर करीब पौने दो बजे झुंझुनूं जिला मुख्यालय होते हुए सूरजगढ़ बाइपास से गांव डांगर पहुंची। रास्ते में जगह-जगह पर शहीद की पार्थिव देह पर पुष्प वर्षा की गई।
इस दौरान लोगों ने 'शहीद सितेंद्र सिंह सांखला अमर रहे' के नारों से आसमां गूंजा दिया। लोगों ने शहीद के घर तक करीब नौ किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली। शहीद के घर से करीब 150 किलोमीटर दूर कृषि भूमि पर अंतिम संस्कार किया गया।
सांखला ने साल 2018 में भारतीय नौसेना नाविक पद पर ज्वाइन की थी। इन दिनों सांखला की पोस्टिंग मुम्बई के नेवी डॉकयार्ड पर थी। वहां रविवार को मेंटेनेंस के दौरान युद्धपोत में आग लग गई। आग संभवतया वेल्डिंग के कारण लगी थी।
आग लगने के कारण जहाज एक तरफ झुक गया था। आग पर 16 घंटे बाद काबू पाया जा सका। हादसे के समय आईएनएस ब्रह्मपुत्र पर करीब 300 अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे। हादसे में केवल सितेंद्र सिंह सांखला के शहीद होने की सूचना है।












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