Shyoram Siradhana : गर्भवती पत्नी से कहा-'बच्चे के जन्म पर आऊंगा घर', आज आए तिरंगे में लिटपकर

jhunjhunu News, झुंझुनूं। पुलवामा में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए राजस्थान के झुंझुनूं जिले के खेतड़ी उपखण्ड के गांव टीबा बसई के श्योराम सिराधना को मंगलवार को अंतिम विदाई दी जाएगी। उनकी पार्थिव देह गांव पहुंच चुकी है।

martyr shyoram siradhana funeral ceremony today in Khetri Jhunjhunu

वहीं पूरे गांव में शोक की लहर है और शहीद श्योराम सिराधना की पार्थिव देह के अंतिम दर्शन करने और अंतिम विदाई देने के लिए जिलेभर से हजारों लोग उमड़े हैं।। बता दें कि 55 आरआर कम्पनी में तैनात श्योराम सिराधना की ड्यूटी इन दिनों जम्मू कश्मीर के पुलवामा में थी।

14 फरवरी को हुआ था सबसे बड़ा आतंकी हमला

14 फरवरी को हुआ था सबसे बड़ा आतंकी हमला

14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए अब तक सबसे बड़े आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। उनमें पांच जवान राजस्थान के भी थे, जिसमें जयपुर के रोहिताश लाम्बा, धौलपुर के भागीरथ सिंह, भरतपुर के जीतराम गुर्जर, राजसमंद के नारायण लाल और कोटा के हेमराज मीणा शामिल थे। पुलवामा हमले के बाद 18 फरवरी की तड़के सेना के जवानों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें एक मेजर समेत चार जवान शहीद हो गए। शहीद जवानों में खेतड़ी के गांव टीबा के बहादुर बेटे श्योराम सिराधना ने भी शहादत दी।

आतंकियों से श्योराम सिराधना शेर की तरह लड़ा

पुलवामा एनकाउंटर में सोमवार तड़के आतंकियों से खेतड़ी का बहादुर बेटा श्योराम सिराधना शेर की तरह लड़ा। सिराधना की शहादत को नमन करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस वीरता को सर्वोच्च मिसाल बताया।

शहीद के पिता का पूर्व में हुआ निधन

शहीद के पिता का पूर्व में हुआ निधन

श्योराम क मित्र राकेश ने बताया कि उनका दोस्त स्कूल के समय से ही होनहार और बहादुर था। उसकी शहादत पर पूरे गांव को गर्व है। मंगलवार को शहीद को अंतिम विदाई दी जाएगी। श्योराम की शादी सरिता देवी से हुई थी। इनके पांच साल का एक बेटा है। पिता बालूराम का पूर्व में देहांत हो चुका है। वहीं मां शारली देवी व अन्य परिजनों को श्योराम की शहादत की सूचना पर रो रोकर बुरा हाल हो गया।

पिछले बार दिसम्बर में आए थे घर

पिछले बार दिसम्बर में आए थे घर

श्योराम सिराधना दिसम्बर 2018 में घर आए थे। इस समय सरिता गर्भवती है। तीन-चार दिन पहले उसकी सरिता से बात हुई तब उसने प्रसव के समय घर आने का वादा किया था। तीन भाइयों में श्योराम सबसे बड़े थे। दूसरा भाई रूपचंद भी सेना में है। वह वर्तमान में हिसार में तैनात है।

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