Rajendta Singh Jhunjhunu : चार माह के बेटे ने मुखाग्नि दी, बेटी बोली-पापा की तरह मैं भी बनूंगी फौजी, VIDEO


झुंझुनूं। कश्मीर के तंगधार में शहीद हुए राजस्थान के झुंझुनूं जिले के खेतड़ी उपखंड के गांव हरड़िया की ढाणी ढहरवाला के राजेंद्र सिंह का शनिवार को राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया। युवाओं ने खेतड़ी के बबाई के पास बनी हवाई पट्टी से लेकर शहीद राजेंद्र सिंह के पैतृक गांव हरड़िया तक तिरंगा यात्रा निकाली।

शहीद राजेन्द्र सिंह जिंदाबाज के नारे से गूंजा हरड़िया गांव

शहीद राजेन्द्र सिंह जिंदाबाज के नारे से गूंजा हरड़िया गांव

शहीद राजेंद्र सिंह का शव सुबह करीब साढ़े दस बजे बबाई पहुंचा था। इसके बाद सैकड़ों युवा तिरंगा यात्रा के साथ उनके घर तक गए। शहीद राजेंद्र सिंह का शव उनके घर पहुंचते ही वहां का माहौल गमगीन हो गया। शहीद वीरांगना सरोज देवी बेसुद हो गई तथा 14 साल की बेटी अंशु का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा था। घर से करीब एक किलोमीटर दूर सेफरागुवार रोड पर शहीद राजेंद्र सिंह की अंत्येष्टि की गई। शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान स्कूली बच्चों व युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर शहीद राजेंद्र सिंह अमर रहे, जब तक सूरज चांद रहेगा राजेंद्र सिंह तेरा नाम रहेगा के गगनभेदी नारे लगाए।

शहीद राजेन्द्र सिंह की बेटी को सौंपा तिरंगा

शहीद राजेन्द्र सिंह की बेटी को सौंपा तिरंगा

जयपुर से आई 20 जाट रेजिमेंट के जवानों व पुलिस की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ आनर दिया। सेना के जवानों ने हवाई फायर कर मातमी धून के साथ शहीद राजेंद्र सिंह को विदाई दी। सेना के अधिकारियों ने शहीद राजेंद्र सिंह की बेटी अंशु को तिरंगा प्रदान किया तो वहां मौजूद हजारों की भीड़ की आंखे नम हो गई। शहीद के चार माह के बेटे करण कृष्णियां ने शहीद राजेंद्र सिंह की चिता को मुखाग्नि दी। वहीं, शहीद की बेटी अंशु ने कहा कि वह पापा की शहादत को नमन करती है और उसकी इच्छा है कि वह भी बड़ी होकर पापा की तरह आर्मी ज्वाइन करे।

शहीद राजेंद्र सिंह का जीवन परिचय

शहीद राजेंद्र सिंह का जीवन परिचय

खेतड़ी हरड़िया पंचायत की ढाणी ढहरवाले के शहीद राजेंद्र सिंह का जन्म 25 जून 1983 को रोहताश कृष्णिया के घर में हुआ था। राजेंद्र सिंह 31 दिसंबर 2001 को सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह सेना की 2 जाट रेजीमेंट में कश्मीर के तंगधार इलाके में तैनात थे। उनका विवाह गोरधनपुरा निवासी सरोज देवी के साथ 2003 में हुआ था। शहीद के पिता रोहताश कृष्णिया का करीब आठ साल पूर्व तथा माता रजकौरी का करीब तीन साल पूर्व देहांत हो चुका है। शहीद राजेंद्र सिंह एक छोटा भाई किशनलाल है जो गांव में ही रहकर खेती बाड़ी का कार्य करता है।

 राजेन्द्र सिंह ऐसे हुए शहीद

राजेन्द्र सिंह ऐसे हुए शहीद

शहीद राजेन्द्र सिंह की पार्थिव देह के साथ आए जवानों ने बताया कि वे करीब दस फीट की चट्टान गिरने से वीरगति को प्राप्त हुए थे। राजेंद्र सिंह कश्मीर के तंगधार इलाके में अपने साथियों के साथ पोस्ट पर डयूटी कर रहे थे। 4 दिसंबर की शाम को अचानक हिमस्खलन से बर्फ की करीब दस फिट की चट्टान उन पर आ गिरी, जिससे वे उसके नीचे दब गए। हिमस्खलन होने की सूचना पर हवास फोर्स की टीम मौके पर पहुंची तथा सर्चिंग अभियान चलाया। पहले इनका मोबाइल, फिर टार्च मिली। टीम द्वारा काफी देर तक बर्फ की खुदाई करने के बाद राजेंद्र सिंह को निकाला तो राजेंद्र सिंह देश के लिए वीरगति का प्राप्त हो चुके थे।

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