Loksabha Election: दौसा लोकसभा सीट से दावेदार कौन ? BJP से जसकौर मीना तो कांग्रेस से मुरारी लाल मीना की चर्चा
Loksabha Election: लोकसभा चुनावों को लेकर देशभर में तैयारी शुरू हो चुकी है, जहां प्रदेश की अलग-अलग लोकसभा सीटों पर BJP और कांग्रेस दोनों ही दलों ने प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
इस बीच अब सियासी गलियारों के साथ-साथ जनता के बीच यह चर्चा चल रही है कि, राजस्थान की 25 अलग-अलग लोकसभा सीटों से दावेदार आखिर कौन होगा? BJP और कांग्रेस आखिर किसे प्रत्याशी बनाएंगे।

सियासी गलियारों के साथ-साथ आमजन के बीच चल रही चर्चाओं को ध्यान में रखते हुए वन इंडिया हिंदी ने 'दावेदार कौन?' सीरीज शुरू की है। जिसके तहत हम आपको बताएंगे कि आखिर आपकी लोकसभा सीट से 'दावेदार कौन?' हो सकता है।
दावेदार कौन?, में हम बात करेंगे राजस्थान की दौसा लोकसभा सीट की, प्रदेश की सिसायत का सेंटर माने जाने वाली लोकसभा सीट में से एक दौसा लोकसभा सीट में आठ विधानसभा सीटें बस्सी, चाससू, थानागजी, बांदीकुई, महुवा, सीकरी, दौसा और लालसोट हैं।
चर्चा है कि दौसा से वर्तमान में भाजपा सांसद जसकौर मीना और कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीना के आपसी खिंचतान के चलते इस बार भाजपा की ओर नए नाम की घोषणा हो सकती है।
हालांकि जानकार सूत्रों की माने तो सांसद जसकौर मीना अपनी बेटी अर्चना मीना को टिकट देने के लिए लगातार लॉबिंग और चर्चा कर रही है। चर्चा तो यह भी है कि 75 पार हुई उम्र के चलते जसकौर मीना को इस बार भाजपा आलाकमान टिकट नहीं देगा।
जिसके चलते बेटी अर्चना मीना को दौसा लोकसभा सीट पर इस चुनाव में सियासी मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।
इधर भाजपा में ही एक ओर दूसरा खेमा ऐसा है जो पिछले कई सालों से जसकौर मीना का धुर विरोधी बना हुआ है। वह है सबसे मजबूत माने जाने वाले कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीना जो अपने पूर्व आरएएस भाई जगमोहन मीना के टिकट को लेकर पूरी तरह से सक्रिय है।
अब अगर बात की जाए कांग्रेस खेमे की तो यहां के कांग्रेस नेता आज भी मानते है कि दिवंगत राजेश पायलट ही असली मिसाह थे। और उनके बेटे और कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट जिस भी व्यक्ति के हाथ तिलक कर देंगे उसे कोई हराने वाला नही है।
पूर्व मंत्री मुरारी लाल मीना ने तो खुले मंच से बिते दिनों दौसा में हुई कार्यकर्ता संवाद में प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा,प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित नेताओं के सामने ही रख दिया।
चर्चा तो यह भी है कि इस लोकसभा चुनाव में मुरारी लाल मीना भी संसद जाने की पूरी तैयारी कर रहे है। और कांग्रेस भी उनके नाम पर जल्द ही मुहर लगा सकती है।
इस चर्चा को ज्यादा इसलिए भी समझा जा रहा है कि मुरारी लाल मीना तमाम सियासी संकटों के बीच पायलट के आगे मजबूती से सुरक्षा दीवार बनकर डटे रहे।
चाहे वो पूर्व वर्ती गहलोत सरकार में हुए गतिरोध का मामला हो या फिर कार्यकर्ताओं के सम्मान में पायलट का धरना और पैदल मार्च हो।
क्या है इस लोकसभा सीट का इतिहास ?
राजस्थान की दौसा लोकसभा सीट ऐसी है जहां कुछ सालों से कांग्रेस-भाजपा के बीच कांटे की टक्कर रही है। बीच में यहां निर्दलीय ने भी बाजी मारी है।
ये सीट पूर्व कांग्रेसी दिग्गज स्वर्गीय राजेश पायलट की वजह से हमेशा चर्चित रही है। इस सीट से राजेश पायलट ने पांच बार चुनाव जीता था। उन्होंने इसे कांग्रेस का किला बना दिया था। लेकिन उनके निधन के बाद हालात बदल गए। पिछली बार भाजपा ने यहां से जसकौर मीणा और कांग्रेस ने सविता मीणा को टिकट दिया है।
कुल 8 विधानसभा सीटें
दौसा में आठ विधानसभा सीटें बस्सी, चाकसू, थानागजी, बांदीकुई, महुवा, सीकरी, दौसा और लालसोट हैं। 2014 चुनाव में यहां 61 फीसदी वोटिंग हुई थी और भाजपा उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी।
दौसा लोकसभा सीट से साल 2014 में भाजपा के हरीश चंद्र मीणा ने जीत दर्ज की। दूसरे नंबर पर डॉ. किरोड़ीलाल मीणा रहे, कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही। लेकिन हरीश मीणा ने दिसंबर 2018 को सांसद पद से इस्तीफा दे दिया। 2018 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हरीश चंद्र मीणा ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया।
खास बात यह है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में हरीश मीणा ने अपने ही बड़े भाई पूर्व केंद्रीय मंत्री और सीनियर कांग्रेस नेता नमो नारायण मीणा को दौसा में मात दी थी। हरीश मीणा पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। वह गहलोत सरकार में राजस्थान पुलिस के डीजीपी भी रह चुके हैं।
कांग्रेस का रहा है दबदबा
ये सीट कांग्रेस के दबदबे वाली सीट रही है। साल 1952 और 1957 में इस सीट से कांग्रेस ने जीत हासिल की। 1962, 1967 में स्वतंत्र पार्टी ने यहां परचम लहराया। 1971 में कांग्रेस, 1977 में जनता पार्टी, फिर 1980, 1984 में कांग्रेस ने दोबारा सीट हासिल की।
1989 में बीजेपी की जीत के बाद 1991 से 2004 तक लगातार 5 बार यह सीट कांग्रेस के पास रही। 1989 में नाथू सिंह गुर्जर ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी।
कांग्रेस के दिवंगत नेता और राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट 1984, 1991, 1996, 1998 में यहां से सांसद रहे।
राजेश पायलट के निधन के बाद साल 2000 में हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी रमा पायलट विजयी हुईं। जबकि साल 2004 के लोकसभा चुनाव में राजेश पायलट के पुत्र सचिन पायलट विजयी हुए।
2009 में पायलट को झटका लगा और निर्दलीय उम्मीदवार किरोणी लाल मीणा यहां से चुनाव जीतकर सांसद बने। 2014 चुनाव में फिर तस्वीर बदली, भाजपा उम्मीदवार हरीश चंद्र मीणा ने कमल खिलाया। हरीश चंद्र मीणा की इस जीत के साथ दौसा में भाजपा को 25 साल बाद विजय नसीब हुई थी। यानी दौसा लोकसभा सीट पर अधिकतर कांग्रेस ही दबदबा रहा है।
दौसा में मीणा और गुर्जर वोटों का असर है। दोनों परस्पर विरोधी माने जाते हैं। माना जाता रहा है कि राजस्थान में गुर्जर समुदाय भाजपा के लिए और मीणा समुदाय कांग्रेस के पक्ष में मतदान करता है। लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व डिप्टी सीएम सचिन पायलट गुर्जर समुदाय से आते हैं हरीश मीणा कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं।












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