लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद राजस्थान कांग्रेस में पड़ेगी फूट, गहलोत-पायलट बढ़ेगी सियासी दूरियां?
Ashok Gehlot vs Sachin Pilot Rajasthan: लोकसभा चुनाव 2024 का परिणाम आने में सप्ताहभर का इंतजार बचा है। 4 जून की मतगणना से पहले एक जून को सातवां व आखिरी चरण का मतदान होगा। इधर, राजस्थान में चर्चा है कि चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस में बड़ा फेरबदल हो सकता है।
राजस्थान की राजनीति के गलियारों में तो चर्चा यहां तक हो रही है कि लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद न केवल राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा की छुट्टी हो सकती है बल्कि अशोक गहलोत व सचिन पायलट के बीच फिर से सियासी मनमुटाव बढ़ सकता है।

अशोक गहलोत व सचिन पायलट के बीच दूरिया बढ़ने की आशंका की एक वजह ये भी बताई जा रही है कि हाल ही अशोक गहलोत ने सचिन पायलट के जालौर सीट पर चुनाव प्रचार वाले बयान को बेवकूफी भरा बताया था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक गहलोत ने चुनावों में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने वालों को नकारा, निकम्मा व गद्दार बताया। गहलोत ने कांग्रेस के अंदर भी कई अवसरवादी नेताओं का जिक्र किया। इस बयान के बाद न केवल कांग्रेस छोड़ बीजेपी में जाने वाले नेताओं ने गहलोत के खिलाफ सियासी मोर्चा खोल लिया बल्कि कांग्रेस के अंदर सचिन पायलट के समर्थकों में भी गुस्सा है।
राजस्थान नेता सुरेश मिश्रा ने कहा कि अपनी ही पार्टी के सभी नेताओं को चोर, निकम्मा आदि बोलना अशोक गहलोत का स्वभाव बन गया है कि सिर्फ वे खुद ही सबसे ज्यादा काम करने वाले हैं। गहलोत कभी सीपी जोशी के कंधे पर तो कभी सचिन पायलट तो कभी परसराम मदेरणा की मेहनत पर बैठकर राज हथिया लिया। गहलोत को अब राजनीति छोड़ देनी चाहिए।
एनडीटीवी राजस्थान की एक खबर के अनुसारी राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के पूर्व सचिव और पायलट समर्थक नेता सुशील आसोपा कहते हैं कि सचिन पायलट को आलाकमान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अधिक महत्व दे रहे हैं। इस वजह से भी अशोक गहलोत ग़ुस्से में रह सकते हैं। गहलोत अब अगर समय के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे तो इनमें कोई उनकी मदद नहीं कर सकता।
उल्लेखनीय है कि अशोक गहलोत तीन बार राजस्थान के सीएम रह चुके हैं। इससे पहले केंद्र में सक्रिय रहे। तीन दशक से ज्यादा समय से राजस्थान कांग्रेस की राजनीति अशोक गहलोत के इर्द-गिर्द रही है। इन्हें राजस्थान की सियासत का जादूगर भी कहा जाता है। सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच खींचतान किसी से छिपी हुई नहीं है।
नोटः यहां पर दी गई जानकारी अखबार, मीडिया रिपोर्ट्स और सट्टा बाजारों के जानकारों के माध्यम से दी गई है।हमारा उद्देश्य सट्टा को किसी भी प्रकार से प्रोत्साहन करना नहीं है।












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