Khatu Mela 2025: खाटूश्यामजी फाल्गुन लक्खी मेला 28 फरवरी से, इस बार खाटू में बदल गईं ये व्यवस्थाएं
khatu Mela 2025: श्याम भक्तों के लिए खुशखबरी है। बाबा श्याम के फाल्गुन लक्खी मेले की तारीखों का ऐलान हो चुका है। खाटूश्यामजी मेला 28 फरवरी 2025 से शुरू होगा, जो 11 मार्च 2025 तक चलेगा। राजस्थान के सीकर जिले के दांतारामगढ़ उपखंड के गांव खाटू में भरने वाले खाटूश्यामजी के मेले में श्याम भक्तों के उत्साह देखते हुए इस बार मेला के दिवस बढ़ाकर 12 किए गए हैं।
खाटू श्याम फाल्गुन मेला 2025 को लेकर सीकर जिला प्रशासन और श्री श्याम मंदिर कमेटी ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। दांतारामगढ़ उपखंड अधिकारी RAS मोनिका सामोर व खाटूश्यामजी एसएचओ राजाराम लेघा की मौजूदगी में खाटूश्यामजी मेला 2025 को लेकर बैठक हुई, जिसमें खाटू मेला 2025 की तैयारियों की समीक्षा की गई।
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Khatu shyam mela 2025: बाबा श्याम के भक्त खाटू के चारण मैदान में रख रखेंगे निशान
दांतारामगढ़ एसडीएम मोनिका सामोर ने कहा कि खाटूश्याम जी मेला 2025 में आने वाले श्याम भक्तों से निशान रखवाने की व्यवस्था खाटू के चारण मैदान में की जाए। सामोर ने विद्युत निगम के एईएन अश्वनी कुमार मीणा से कहा कि खाटू मेला 2025 में बिजली ट्रिपिंग की समस्या से निजात पाने के लिए कई जगहों पर स्थायी ट्रांसफार्मर रखने, बिजली लाइन भूमिगत करने और तारों को ऊंचा करने का कार्य समय रहते पूर्ण कर लिया जाए।
Khatu Shyam ji Parking: खाटूश्यामजी मेला 2025 में पार्किंग कहां पर होगी?
खाटू श्याम जी मेला 2025 में वाहन लेकर आने वाले बाबा श्याम के भक्तों को परेशानी ना हो इसके लिए रींगस रोड पर 52 बीघा में वाहन पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सांवलपुरा रोड पर चारागाह भूमि और PWD रोड पर भी वाहन पार्किंग की सुविधा रहेगी।
(Khatushyam ji Story in Hindi) खाटूश्याजी का मेला प्रसिद्ध क्यों है?
खाटूश्यामजी का फाल्गुन लक्खी मेला राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटूश्यामजी के प्रसिद्ध मंदिर में आयोजित होने वाला एक ऐतिहासिक और भव्य धार्मिक आयोजन है। इसका इतिहास प्राचीन और धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
(Khatu Mela History in Hindi) मेला और खाटूश्यामजी का इतिहास
पौराणिक मान्यता: खाटूश्यामजी को कलियुग के भगवान श्रीकृष्ण के अवतार और उनके भक्त वीर बर्बरीक के रूप में पूजा जाता है। महाभारत के युद्ध में, बर्बरीक ने अपनी वीरता और त्याग से भगवान श्रीकृष्ण को प्रभावित किया। कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में उनकी पूजा श्याम के रूप में होगी, और वे सभी भक्तों की इच्छाएं पूरी करेंगे।
मंदिर निर्माण: खाटूश्यामजी का मंदिर 11वीं शताब्दी में बनाया गया था। माना जाता है कि बर्बरीक का शीश कुंडलपुर नामक स्थान पर दबा हुआ था। खाटू के राजा ने स्वप्न में शीश मिलने की बात सुनी, और बाद में इसका उत्खनन करके भव्य मंदिर का निर्माण किया।
फाल्गुन लक्खी मेला 2025: हर साल फाल्गुन मास (फरवरी-मार्च) में शुक्ल पक्ष की अष्टमी को इस मेले का आयोजन होता है। यह वह समय माना जाता है जब बर्बरीक ने श्रीकृष्ण को अपना शीश अर्पित किया था।
खाटूश्यामजी फाल्गुन लक्खी मेले की विशेषताएं
भक्तों की विशाल संख्या: इसे लक्खी मेला कहा जाता है क्योंकि इसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। भक्त देशभर से यहां दर्शन करने और भगवान श्याम का आशीर्वाद लेने आते हैं।
पैदल यात्रा: मेले में पैदल यात्रा का विशेष महत्व है। भक्त कई किलोमीटर दूर से पैदल चलकर खाटूश्यामजी के दर्शन के लिए आते हैं।
धार्मिक गतिविधियां: मेले में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन, जागरण, और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। भक्त खाटूश्यामजी के जाल और सिंदूर का विशेष महत्व मानते हैं।
प्रसाद और सेवा: मेले के दौरान बड़े पैमाने पर लंगर और सेवा शिविर लगाए जाते हैं, जहां भक्तों को भोजन, पानी, और ठहरने की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
महत्व और परंपरा: खाटूश्यामजी का मेला न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह त्याग, भक्ति, और समर्पण का प्रतीक है। मेले का वातावरण भक्ति से भरपूर होता है और यह भक्तों को भगवान श्याम के प्रति श्रद्धा से जोड़ता है।
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