Vijay Diwas 2024: ये हैं पहाड़ सा हौसला वालीं वीरांगनाएं, कारगिल में पति की शहादत के बाद बेटों को फौज में भेजा
Vijay Diwas 2024 Army Inspirational Story: भारत-पाकिस्तान युद्ध 1999 को आज 25 साल पूरे हो गए। देशभर में कारगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है। आज शहीदों के जज्बे और वीरांगनाओं के साहस को सलाम किया जा रहा है। युवा पीढ़ी को वीरों की गाथा सुनाई जा रही है।
कारगिल जंग में वतन पर मर मिटने वाले शहीदों की वीरांगनाओं के हौसले भी पहाड़ से हैं। इसकी एक बानगी वो वीरांगनाएं हैं, जिन्होंने जंग में पति की शहादत देखने के बाद बेटों को भी फौज में भेज दिया। राजस्थान के कारगिल शहीदों के ये बेटे वर्तमान में देश की रक्षा में विभिन्न जगहों पर तैनात हैं।

कारगिल शहीद शीशराम गिल
कारगिल जंग में पाकिस्तान को धूल चटा देने वाले शहीद शीशराम गिल राजस्थान के झुंझुनूं के रहने वाले थे। भारतीय सेना में हवलदार पद पर रहते हुए शीशराम गिल ने कारगिल जंग में अदम्य साहस दिखाया और पाकिस्तान के छह सैनिकों को मार गिराया था। शीशराम की शहादत के बाद वीरांगना संतरा देवी ने बेटे कैलाश गिल को भारतीय सेना में भेज दिया। कैलाश गिल भी हलवदार हैं।
कारगिल शहीद विक्रम सिंह तंवर
भारतीय सेना में राइफलमैन विक्रम सिंह तंवर ने अदम्य साहस दिखाया था। कारगिल जंग 1999 में विक्रम सिंह पाकिस्तान सैनिकों पर टूट पड़े थे और शरीर 9 गोलियों से छलनी होने के बाद भी पाकिस्तान के कई फौजी मार गिराए थे। कारगिल में पिता की शहादत के वक्त इनका बेटा नीरज महज चार साल का था, जो आज भारतीय सेना में सेवाएं दे रहा है। शहीद वीरांगना कृष्णा कंवर ने बेटे को भी फौजी ही बनाया।
कारगिल शहीद ओमप्रकाश
भारत-पाकिस्तान युद्ध 1999 में राजस्थान के करौली की नादौती तहसील के ओमप्रकाश ने भी शहादत दी थी। उनकी वीरांगना कलिया देवी ने कारगिल जंग के बाद बेटे विजय सिंह को भी देश की रक्षा और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय फौज में भेज दिया।












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