राजस्थान हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस केआर श्रीराम कौन हैं? जानें मुंबई से जोधपुर तक का पूरा सफर
भारतीय न्यायपालिका में तीन दशकों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले जस्टिस श्रीराम कल्पाती राजेंद्रन (केआर श्रीराम) को राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) नया चीफ जस्टिस बनाया गया है। राजस्थान राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने नवनियुक्त चीफ जस्टिस केआर श्रीराम को 21 जुलाई 2025 को पद की शपथ दिलाई। मूल रूप से महाराष्ट्र के निवासी चीफ जस्टिस श्रीराम का राजस्थान हाईकोर्ट तक का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है।
शपथग्रहण समारोह में राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांशु पंत ने राज्यपाल हरिभाऊ बागडे की अनुमति लेकर राष्ट्रपति की ओर से जारी नियुक्ति पत्र पढ़ा। इसके बाद जस्टिस श्रीराम ने राजस्थान हाईकोर्ट के 43वें चीफ जस्टिस के रूप में अंग्रेजी में शपथ ली। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी समेत अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने नए चीफ जस्टिस को बधाई दी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर उनका तबादला मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद से राजस्थान हाईकोर्ट में किया गया है। इसी तरह से राजस्थान हाईकोर्ट के निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएम श्रीवास्तव को मद्रास हाईकोर्ट भेजा गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट (hcraj.nic.in) के 'प्रोफाइल' अनुभाग के अनुसार चीफ जस्टिस का जन्म 28 सितंबर 1963 को हुआ है। इनके पास बीकॉम, एलएलबी व एलएलएम की डिग्री है। वकील के रूप में 03 जुलाई 1986 को नामांकित हुए। अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में इनको 21 जून 2013 को पदोन्नति मिली और 02 मार्च 2016 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए। 21 जुलाई 2025 को राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने।
उपलब्ध न्यायिक दस्तावेजों और रिपोर्टों के अनुसार जस्टिस केआर श्रीराम बॉम्बे हाईकोर्ट में वरिष्ठ न्यायाधीश और मद्रास हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के पद पर भी वे सेवाएं दे चुके हैं। 27 सितंबर 2024 को जस्टिस केआर श्रीराम ने मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद के शपथ ग्रहण की थी।
शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
मुंबई में जन्मे, पले-बढ़े जस्टिस केआर श्रीराम ने मुंबई विश्वविद्यालय से बी.कॉम (वित्तीय लेखांकन और प्रबंधन) और एलएल.बी. की पढ़ाई की। किंग्स कॉलेज, लंदन से मेरिट के साथ एलएल.एम. (मेरिटाइम लॉ) की उपाधि प्राप्त की।
वकालत की शुरुआत और विशेषज्ञता
जस्टिस श्रीराम ने वर्ष 1986 में महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एस. वेंकिटेश्वरन के चेंबर से वकालत की शुरुआत की। वाणिज्यिक मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। खासकर शिपिंग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून, पोर्ट अधिनियम, कस्टम अधिनियम, मोटर वाहन अधिनियम, समुद्री बीमा, कंपनी कानून और रिट याचिकाओं से जुड़े मामलों में। साल 1997 में स्वतंत्र रूप से वकालत शुरू कर अपने क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई।
न्यायिक दायरे से बाहर भी निभाई अहम भूमिका
निजी जीवन में यात्रा और गोल्फ का शौक रखने वाले जस्टिस केआर श्रीराम ने सिर्फ अदालत के भीतर नहीं, बल्कि न्यायिक ढांचे को बेहतर बनाने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभाई। बॉम्बे हाईकोर्ट की एडमिरल्टी मामलों से जुड़ी कोर कमेटी-I के सदस्य के रूप में उन्होंने नियमों के एकीकरण पर सुझाव दिए। सामाजिक मोर्चे पर भी वे उतने ही सक्रिय रहे। वर्षों तक वे 'धर्मिष्ठ मित्रण' नामक एनजीओ के उपाध्यक्ष रहे, जो मृत व्यक्तियों की अंतिम विधियों में मदद करती है।












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