जांबाज सिपाही नीरज अहलावत ने जैश ए मुहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर को 50 मीटर दूर से यूं किया ढेर

झुंझुनूं, 12 मई। जैश ए मुहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर तैयब वालिद को ढेर करने वाले भारतीय सेना के जवान नीरज अहलावत को शौर्य चक्र से सम्मानि​त किया गया है। सेना की 34 जाट रेजीमेंट के जांबाज सिपाही नीरज अहलावत मूलरूप से राजस्थान के झुंझुनूं जिले के बुहाना उपखंड के गांव मनोहरपुर के रहने वाले हैं। नई दिल्ली में मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उपराष्ट्रपति वैकेंया नायू की मौजदूगी में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नीरज अहलावत को शौर्य चक्र से सम्मानित किया।

मां विनोद देवी भी पहुंचीं दिल्ली

मां विनोद देवी भी पहुंचीं दिल्ली

बेटे के सम्मान के अवसर पर मां विनोद देवी भी गांव मनोहरपुरा से दिल्ली पहुंची थी। मीडिया से बातचीत में नीरज अहलावत ने दो साल पहले की वो घटना बयां की, जिसमें उन्होंने जैश ए मुहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर को महज 50 मीटर दूर से शूट कर दिया था।

ब्रेवो कंपनी के 12 साथी उस घर की घेराबंदी कर रहे

ब्रेवो कंपनी के 12 साथी उस घर की घेराबंदी कर रहे

नीरज ने बताया कि 'मेरी ड्यूटी जम्मू कश्मीर में थी। 20 जून 2020 को सूचना मिली कि पुलवामा के सोपिया क्षेत्र के लकड़ीपुर गांव के एक घर में आतंकी घुसे हैं। शाम करीब साढ़े चार बजे हमारी ब्रेवो कंपनी के 12 साथी उस घर की घेराबंदी कर रहे थे।'

 आतंकियों ने सिविलियन को बनाया ढाल

आतंकियों ने सिविलियन को बनाया ढाल

'मैं ब्रेवो कंपनी को गाइड कर रहा था। अपने को घिरता देखकर मकान में छिपे आतंकी एक बालक व दो महिलाओं को ढाल बनाकर फायरिंग करते हुए भागने लगे। मैंने पेड़ के पीछे पॉजिशन लेकर सिविलियन को बचाते हुए 50 मीटर दूर से फायर किया।'

मौके पर ढेर हुआ जैश ए मुहम्मद का पाकिस्तानी कमांडर

'मेरी बंदूक से निकली गोली से एक आतंकी मौके पर ही ढेर हो गया। दूसरा फायरिंग कर भागने लगा। मैंने फिर पॉजि​शन ली और उस पर फायर किया। वह घायल हो गया। बाद में पता चला कि मैंने जिस आतंकी को ढेर किया वो जैश ए मुहम्मद का पाकिस्तानी कमांडर तैयब वालिद था। जैश ए मुहम्मद का पाकिस्तानी कमांडर तैयब वालिद के पास से विदेशी असॉल्ट राइफल एम 4 मिली। इस एनकाउंटर में सिविलियन को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।'

कौन हैं शौर्य चक्र विजेता नीरज अहलावत?

बता दें कि नीरज अहलावत साल 2013 में झुंझुनूं सेना भर्ती रैली में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। सात जाट रेजीमेंट में विभिन्न स्थानों पर तैनात रहे। साल 2017 में जम्मू कश्मीर में 34 आरआर में पोस्टिंग हुई। 20 जून 2020 को जम्मू कश्मीर में हुए विशेष अभियान का हिस्सा रहे। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर शौर्य चक्र की घोषणा हुई थी, जो मंगलवार को मिला।

 गांव में जोरदार स्वागत

गांव में जोरदार स्वागत

इधर, शौर्य चक्र मिलने के बाद नीरज अहलावत ने पहली बार गांव आए। तब ग्रामीणों ने उनके स्वागत में पलक पांवड़े बिछा दिए। हरियाणा बॉर्डर से उनके गांव मनोहरपुर तक रास्ते में जगह-जगह उनका स्वागत किया गया। खुली जीप में डीजे के आगे नाचते-गाते लोग नीरज अहलावत जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। नीरज के पिता ब्रजभान का साल 2009 में निधन हो चुका है।

क्या है शौर्य चक्र?

क्या है शौर्य चक्र?

उल्लेखनीय है कि भारतीय सेना में वीरता के लिए फौजियों को शौर्य चक्र प्रदान किया जाता है। यह सम्मान असाधारण बहादुरी या बलिदान के लिए मरणोपरांत भी मिलता है। वरीयता में कीर्ति चक्र के बाद दूसरा बड़ा पदक है। शौर्य चक्र विजेताओं को राज्य सरकार की ओर से कई सुविधाएं दी जाती हैं। राज्य सरकार की तरफ से 8.50 लाख रुपए नकद भी दिए जाते हैं। साथ ही 25 बीघा जमीन या 25 लाख रुपए नकद, रोडवेज व रेलवे में आजीवन निशुल्क यात्रा की सुविधा भी मिलती है।

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