700 एकड़ में फैला देश का सबसे लंबा किला, बारिश के बाद हरियाली से कैसे निखरी खूबसूरती, देखिए
चित्तौड़गढ़। मानसूनी बरसात के सीजन में राजस्थान की पहाड़ियों पर स्थित कुछ किले-महल ऐसे प्रतीत हो रहे हैं, जैसे हाल ही बने हों। किले परिसर की चारदीवारी से लेकर सीढ़ियों, छतरियों, पोल एवं मंदिरों की सफाई देखते ही बन रही है। वहीं, किलों के आस-पास झीलें पानी से लबालब हैं..और टूरिस्ट्स का तांता लगा है।टूरिस्ट्स यह तो मानते ही हैं कि राजस्थान ने हमेशा अपनी ऐतिहासिक संपदा एवं खूबसूरती से लोगों को प्रभावित किया है। किंतु बरसात के दिनों जो प्राकृतिक खूबसूरती उभरकर आती है...उसका कोई जवाब नहीं होता। यहां चित्तौड़गढ़ किले को देखें तो बहुत से पर्यटकों की इच्छा होती है कि यहीं खाएं और सोएं।

700 एकड़ में फैला, 500 फीट ऊंचाई वाला किला
चित्तौड़गढ़ किला दरअसल है ही ऐसा, जहां इन दिनों लोग जाना जरूर चाहेंगे। इसने हरियाली की चादर ओढ़ी हुई है। सात द्वारों वाला यह किला, यूं तो 7वीं शताब्दी से ही अस्तित्व में है। यहां कई राजाओं ने शासन किया। इसीलिए, चित्तौड़गढ़ को शूरवीरों का शहर कहा गया। अपने निर्माण के समय से ही चित्तौड़गढ़ किले ने इतिहास के कई उतार-चढाव देखे हैं। यहां के राजा ने सुरक्षा-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए, पहाड़ पर लंबी-लंबी दीवारें बनवाईं और खाइयां खुदवाईं। इस तरह यह किला लगभग 700 एकड़ में फैला और 500 फुट की ऊंचाई पर बना।

देवताओं के नाम पर हैं यहां 7 दरवाजे
इस किले में सात दरवाजे हैं, जिनके नाम हिंदू देवताओं के नाम पर पड़े हैं। इनके नाम हैं पैदल पोल, भैरव पोल, हनुमान पोल, गणेश पोल, जोली पोल, लक्ष्मण पोल और अंत में राम पोल। किले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, यह किला 7वीं से 16वीं शताब्दी तक शासन का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। इसकी विशेषता इसके अनोखे मजबूत किले, प्रवेश द्वार, बुर्ज, महल, मंदिर तथा जलाशय हैं, जो राजपूत वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने भी हैं।

प्राकृतिक जलग्रहों में जमा होता है पानी
इस किले में कई जल निकाय हैं जिन्हें वर्षा या प्राकृतिक जलग्रहों से पानी मिलता रहता है। इन दिनों यहां झील और तालाब पानी से भरे हुए हैं। पेड़ों और झाड़ियों से हरियाली ही हरियाली फैली हुई है।

शत्रु से बचने के लिए लगाए थे नुकीले पत्थर
इस किले पर तीन बार शत्रु सेना ने आक्रमण किया। पहला आक्रमण सन् 1303 में अलाउद्दीन खलिजी द्वारा, दूसरा सन 1535 में गुजरात के बहादुरशाह द्वारा तथा तीसरा सन 1567-68 में मुगल बादशाह अकबर द्वारा किया गया था। यहां के शासकों ने इस्लामिक आक्रांताओं से बचने के लिए किले की दीवारें भारी पत्थरों से बनवाईं।

बहुत से मंदिर और स्थापत्य कलाकृतियां हैं
यह किला अनेक दर्शनीय और ऐतिहासिक निशानियों से परिपूर्ण है। इसकी प्रसिद्ध स्मारकीय विरासत की विशेषता इसके बुर्ज, प्रवेश द्वार, महल व मंदिर हैं। कई जलाशयत हैं, जो राजपूत वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने हैं।

ये हैं चित्तौड़गढ़ फोर्ट के 7 प्रवेश द्वार
इस किले में कुल सात प्रवेश द्वार हैं। जिनमें राम पोल, सूरज पोल, भैरव पोल, हनुमान पोल, गणेश पोल, जोली पोल और लक्ष्मण पोल। सभी का अलग-अलग महत्व है। इसी किले के पास विशाल जैन कीर्ति स्तंभ भी ही स्थित है, जहां तीर्थयात्री ज्यादा आते हैं।

प्राचीन महावीर स्वामी मंदिर
दुर्ग के पास ही चित्तौडगढ़ में महावीर स्वामी के मंदिर के दर्शन भी लोग करते हैं। यहीं से कुछ दूरी पर खाने-पीने की भी व्यवस्था हो जाएगी। खाने के लिए यहां दाल-बाटी, चूरमा एवं अन्य राजस्थानी रेसिपी का भोजन मिलेगा।












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