राजस्थान के जोधपुर में फर्जी कॉल सेंटर से 9 युवतियां हिरासत में,जानिए वजह
Rajasthan police raided a fake call center: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के जादूगर अशोक गहलोत की नगरी जोधपुर में साइबर ठगों के कॉल सेंटर का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
सूर्य नगरी जोधपुर में पुलिस ने एक ऐसे फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारा 9 युवतियों को हिरासत में दिया है जो नए वाहन मालिकों को सर्विस के नाम पर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे।

अगर आपने नया वाहन लिया है तो इन साइबर ठगों से सावधान रहिएगा यह साइबर ठग जोधपुर ही नहीं पूरे भारत में कुछ इस तरीके से साइबर ठगी को अंजाम देता था कि वाहन मालिक नया वाहन खरीदने की खुशी में कब इन ठगों का शिकार बन जाता है उसे पता ही नही चल पाता।
जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट की कुड़ी भगतासनी थाना पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर पर धावा बोला और यहां से 9 युवतियों को हिरासत में लिया। कॉल सेंटर का संचालक मौके से फरार हो गया ।
जब पुलिस ने इस पूरे मामले में पड़ताल शुरू की तो होश उड़ाने वाले तथ्य सामने आए यह कॉल सेंटर उन वाहन मालिकों को फोन करता जो नया वाहन खरीदता और उसे बताता की 3000 रूपए में वह पूरे भारत में उनकों सुविधाएं देंगे और अगर उनका वाहन खराब हो जाता है तो उनकी टीम तुरंत उनके पास पहुंचेगी।
वाहन मालिकों के वाहन को सही करवा कर उन्हें देगी और उन्हें गंतव्य तक भी पहुंचा देगी। नया वाहन मालिक इन लोगों के झांसे में आ जाता। कुड़ी भगतासनी पुलिस थाना अधिकारी ने बताया कि युवतियों को 7 से 8 रूपए हजार महीने में इस कॉल सेंटर पर काम करती और जो डाटा इन्हें दिया जाता है।
जो नम्बर कॉल सेंटर पर काम करने वाली महिलाओं को दिया जाता है उन्हें कॉल किया जाता । नए वाहन मालिक को बताया जाता था कि जब कार्ड उनके पास पहुंच जाए तो कैश ऑन डिलीवरी देनी है। जिससे वाहन मालिक भी इनके झांसे में आ जाता।
कार्ड की बनावट भी कुछ इस तरीके से की गई थी कि हर कोई देखकर उनकी बातों में आ जाता। कार्ड पर लिखा होता "इंडियन ब्रेकडाउन सर्विस इंडिया" वहीं 12 डिजिट का एक नंबर भी होता था "इंडिया ब्रेकडाउन सर्विस टू इंडिया इन पन इंडिया" भी इस कार्ड पर लिखा था।
थाना पुलिस ने बताया कि ऑपरेशन साइबर ब्रिज प्रहार 1.0 के तहत मुख्यालय द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के बाद इस फर्जी कॉल सेंटर पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया अब पुलिस की टीम में कॉल सेंटर के मालिक की तलाश में जुट चुकी है।
कॉल सेंटर संचालक इतना शातिर था कि वाहन चालकों को साइबर ठगी का शिकार बनाने के लिए युवतियों से कॉल करवाता। युवतियों भी कम उम्र की थी और उन्हें भी पता नहीं था कि यह कॉल सेंटर फर्जी है वो तो महज अपने रोजगार के लिए काम कर रही थी।












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