पहली ही पोस्टिंग में वतन पर कुर्बान हुए राजस्थान के हरि भाकर, बहन की शादी करके आए थे बॉर्डर पर
Nagaur News, नागौर। बहन की शादी के महीनेभर बाद फौजी भाई तिरंगे में लिपटकर घर लौटा तो कोई पूरा जूसरी गांव रो पड़ा। यह गांव है जम्मू कश्मीर के पुंछ इलाके के शाहपुरा सेक्टर में शनिवार शाम पाकिस्तान की ओर से की गई गोलीबारी में शहीद हुए हरि भाकर का।

राजस्थान के नागौर जिले की मकराना तहसील के गांव जूसरी के शहीद हरि भाकर की शहादत पर पूरे देश को गर्व है, क्योंकि महज 21 साल की उम्र में हरि सरहद पर अदम्य साहस दिखाते हुए वीरगति को प्राप्त हुए हैं। सोमवार सुबह जूसरी गांव में सैनिक सम्मान के साथ हरि भाकर का अंतिम संस्कार किया गया।
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उनकी शहादत यात्रा में पूरा नागौर उमड़ा। उनकी पार्थिव देह रविवार शाम को सेना के विशेष विमान से जयपुर पहुंची और फिर यहां से रात को गांव जसूरी लाई गई थी। रात को पार्थिव देह गांव के आईटी सेंटर में रखी गई। सुबह शहीद के घर पहुंची।
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पुलवामा हमले के बाद ड्यूटी पर लौटे
हरि भाकर फरवरी 2019 में अपने गांव आए थे। नौ फरवरी को इनकी बड़ी बहन मनोज की शादी के लिए अवकाश लेकर आए हुए थे। बहन की शादी के पांच दिन 14 फरवरी को पुलवामा हमला होने पर उसी शाम को पुंछ के लिए घर से विदा हो गए थे। परिवार में इस 27 मार्च को भी कार्यक्रम है, मगर इसके लिए हरि भाकर ने घर वालों को बताया था कि सरहद पर तनाव है। इसलिए वे 27 मार्च वाले कार्यक्रम में नहीं आ पाएंगे।
शहीद हरि भाकर का जीवन परिचय
(Biography of Shaheed Hari Bhakar Makrana Rajasthan) मकराना तहसील के जूसरी के पदमाराम के घर पर एक अक्टूबर 1998 को दो जुड़वां बच्चे हरि व हरेन्द्र ने जन्म लिया। दोनों भाई बचपन से सेना में जाने काे आतुर थे। 17 साल 6 माह 11 दिन की आयु का होते ही हरी सेना भर्ती रैली में शामिल हो गए। पहले प्रयास में ही सिलेक्ट होने पर हरि को जुलाई 2016 में 4 ग्रेनेडियर्स सेन्टर जबलपुर ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। ट्रेनिंग के बाद पुंछ के शाहपुरा सेक्टर में पहली पोस्टिंग मिली। करीब सात माह पहले हरि से दो मिनट छोटे भाई हरेन्द्र का भी सेना में चयन हो गया। वह फिलहाल 4 ग्रेनेडियर सेन्टर जबलपुर में ट्रेनिंग ले रहा है।

नायब सूबेदार चैनाराम ने बताया कि शनिवार शाम सवा 6 बजे पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी हुई तो इधर से भी जवाबी कार्रवाई की गई। करीब सवा 1 घंटे तक फायरिंग चलती रही। इस दौरान पाकिस्तान की ओर से एक ही जगह 28 गोले दागे गए। तभी एक गोला दीवार से टकरा कर हरि के लेफ्ट पैर पर गिरा था। हरि रॉकेट लॉन्चर चलाते थे। घायल होने के बावजूद हरि ने गोले दागने शुरू कर दिए और दुश्मन सेना के चार जवान घायल कर दिए। इसके बाद वे बेहोश हो गए। उपचार के दौरान तड़के साढ़े तीन बजे हरि वीर गति को प्राप्त हो गए।
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