Rajasthan News: गंगाजल विवाद में फंसे ज्ञानदेव आहूजा पर गिर सकती है गाज़, भाजपा से निकाले जा सकते हैं!

Gyandev Ahuja: राजस्थान भाजपा में जारी सियासी घमासान के केंद्र में एक बार फिर वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा आ गए हैं। मंदिर में गंगाजल छिड़कने के विवाद के चलते पार्टी ने उन्हें पहले ही निलंबित कर दिया था, लेकिन अब उनके निष्कासन की आशंका गहरा गई है।

दरअसल, दलित समुदाय से आने वाले कांग्रेस नेता टीकाराम जुली के मंदिर दर्शन के बाद आहूजा ने मंदिर को "अशुद्ध" बताते हुए गंगाजल से शुद्धीकरण करने की बात कही थी। इसके अगले दिन उन्होंने मंदिर जाकर गंगाजल छिड़का, जिसके बाद यह मामला तूल पकड़ गया। कांग्रेस ने इसे दलित अपमान का मुद्दा बनाते हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में उठाया और विरोध प्रदर्शन किए।

Gyandev Ahuja

भाजपा ने भी आहूजा की टिप्पणी को गंभीरता से लेते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। पार्टी ने उनसे तीन दिन में जवाब देने को कहा था। आहूजा ने जवाब तो भेजा, लेकिन माफी मांगने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि उन्होंने किसी विशेष वर्ग का अपमान नहीं किया है और वे स्वयं दलितों के समर्थक रहे हैं।

अब मामला भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और प्रदेश प्रभारी डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के पाले में है, जो वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर अंतिम फैसला लेंगे। खबर है कि पार्टी आहूजा को निष्कासित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस घटनाक्रम ने राजस्थान भाजपा की अंदरूनी राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और सभी की नजरें अब पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं।

ज्ञानदेव आहूजा कौन हैं?

​राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा एक फायरब्रांड नेता के रूप में जाने जाते हैं, जो अपने विवादास्पद बयानों के कारण अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। नीचे उनका संक्षिप्त जीवन परिचय प्रस्तुत है:​

पूरा नाम: ज्ञानदेव आहूजा​
जन्म तिथि: 1 अक्टूबर 1950​
जन्म स्थान: ब्यावर, राजस्थान​
शिक्षा: 12वीं तक की पढ़ाई​
समुदाय: सिंधी​
पूर्व पेशा: पत्रकारिता; साप्ताहिक 'मत सम्मत' के प्रबंध संपादक​

ज्ञानदेव आहूजा​ का राजनीतिक करियर

राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की।​
1993 में भाजपा के टिकट पर रामगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।​
1998 में पहली बार विधायक चुने गए।​
2003 में चुनाव हारे, लेकिन 2008 और 2013 में फिर से विधायक बने।​
2018 में भाजपा ने टिकट नहीं दिया, तो सांगानेर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया, लेकिन बाद में भाजपा उम्मीदवार को समर्थन दे दिया।​

ज्ञानदेव आहूजा से जुड़े प्रमुख विवाद

2016 में JNU विवाद के दौरान दावा किया कि वहां प्रतिदिन 3,000 कंडोम और नशे के उपकरण मिलते हैं।​
2017 में गौ-तस्करी और वध करने वालों की हत्या की बात कहकर विवाद में आए।​
2025 में दलित नेता टीकाराम जूली के मंदिर में पूजा करने के बाद गंगाजल से शुद्धिकरण करने पर भाजपा ने उन्हें निलंबित किया और कारण बताओ नोटिस जारी किया।

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