बाल विवाह का दंश झेलने वाली गीता को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2020, राजस्थान से इकलौती टीचर

बाड़मेर। शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा कहे जाने वाला सरहदी बाड़मेर जिला एक बार फिर सुर्खियों में है। जिले के सर का पार निवासी गीता कुमारी का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन हुआ है। शिक्षा विभाग भारत सरकार की ओर से देश में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार की घोषणा की गई है। पूरे देश में विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करने वाले 47 शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा।

मालियों का वास में हैं कार्यरत

मालियों का वास में हैं कार्यरत

बता दें कि राजस्थान से एकमात्र गीता कुमारी का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2020 के लिए चयन हुआ है। गीता बाड़मेर के राजकीय शिक्षाकर्मी प्राथमिक विद्यालय सरूपोणी मालियों का वास में शिक्षिका के पद पर कार्यरत है। वह हमेशा अभावों में रही है। फिर भी कुछ कर गुजरने की ललक ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला दी है।
आठवीं कक्षा के बाद स्कूल छूट गई थी। इसके बाद गीता की शादी हो गई। ससुराल में भी आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी सकारात्मक सोच के साथ हर मुश्किल को आसान बनाने की जद्दोजहद में लगी रही।

नवाचार करते हुए पाए ईनाम

नवाचार करते हुए पाए ईनाम

स्कूल में नवाचार करते हुए कई इनाम भी पाए। स्कूल के लिए परिवार से तीन बीघा जमीन भी दान करवाई। अब यहां शैक्षिक एवं गैर शैक्षिक कार्य की बेहतरीन गतिविधियां संचालित हो रही है। इसी स्कूल में गीता सेवाएं दे रही हैं। लग्न ऐसी है कि इससे पहले भी इस स्कूल के दो छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर स्कॉलरशिप के लिए चयन करवाया था।

 गीता कुमार का जीवन परिचय

गीता कुमार का जीवन परिचय

गीता कुमारी का जीवन संघर्ष भरा रहा है। उन्होंने 1997 में आठवीं पास की। इसके बाद 2000 में शादी हो गई। 2001 में दसवीं पास की। एक साल बाद बेटे की मां बन गई। साल 2002 में शिक्षाकर्मी बनी। साल 2004 में 12वीं पास की। 2006 में बीएसटीसी, 2008 में प्रबोधक, 2009 में बीए, 2011 में एमए समाजशास्त्र, 2014 में बीएड, 2015 में एमए भूगोल, 2019 में एमए पुलिस प्रशासन में प्रवेश लिया जो कि अध्ययनरत हैं।

 तीन बीघा भूमि दान करवाई

तीन बीघा भूमि दान करवाई

वहीं, 2002 में स्कूल के लिए 3 बीघा भूमि दान करवाई। यहां की छात्र-छात्राओं को राज्य स्तरीय बुलबुल कार्यक्रम, नेपाल हिमाचल, सिक्किम साहसिक भ्रमण करवाया है। तीन वर्षों से जिले से एक मात्र फ्लांक लीडर स्काउट गाइड साहसिक कार्य में भाग भी ले रही है।

 कुछ कर की हो ललक

कुछ कर की हो ललक

शिक्षण गतिविधियों में नवाचार, वेस्ट इज बेस्ट कार्यक्रम, हरियालो विद्यालय कैंपेन को लेकर शिक्षा विभाग की शिविरा में भी स्कूल को स्थान मिला है। इन्हीं की बदौलत राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार में चयनित हुई हैं। गीता बताती हैं कि अगर कुछ कर गुजरने की चाह हो तो कोई भी बाधाएं आड़े नही आती है। यहीं वजह है कि आज मुझे यह मुकाम हासिल हुआ है।

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