राजस्थान में 92 साल तक चला गंगा माता मंदिर का निर्माण, अब टैंकर से आता है 15 हजार लीटर गंगाजल
गंगा दशमी 2023 के मौके जानिए राजस्थान के भरतपुर स्थित गंगा माता मंदिर का रोचक इतिहास।

आज देशभर में गंगा दशमी मनाई जा रही है। गंगा माता के मंदिरों में विशेष आयोजन हो रहे हैं। इस बीच राजस्थान के भरतपुर शहर में लोहागढ़ किले के सामने स्थित गंगा माता के मंदिर की रोचक कहानी सुर्खियों में है।
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दावा किया जाता है कि उत्तर भारत में गंगा माता का यह इकलौत सबसे भव्य मंदिर है। कहते हैं कि इसका निर्माण 92 साल चला। राज परिवार की पांच पीढ़ियों के हाथों इसका निर्माण कार्य हुआ।
कहानी ये है कि भरतपुर के महाराजा बलवंत सिंह ने संतान प्राप्ति के लिए मां गंगा से मन्नत मांगी थी। मनोकामना पूरी होने पर उन्होंने लोहागढ़ किले के सामने 1845 में गंगा माता मंदिर की नींव रखी। 92 साल तक मंदिर का निर्माण चला। इस दौरान पांच पीढ़ियों ने अपने अपने हिसाब से निर्माण करवाया।
महाराज बलवंत सिंह निर्माण शुरू करवाया और साल 1937 में भरतपुर के अंतिम महाराजा बृजेन्द्र सिंह ने मंदिर में गंगा माता के मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराई। यहां श्रद्धालुओं को प्रसाद में गंगाजल दिया जाता है।
यूपी के अलीगढ़ से टैंकर में गंगाजल भरकर भरतपुर मंगवाया जाता है। अब तक 15 लाख लीटर गंगाजल मंगवाकर वितरित किया जा चुका है।
मीडिया से बातचीत में भरतपुर के गंगा माता मंदिर पुजारी मानवेंद्र शर्मा बताते हैं कि ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशमी मनाई जाती है। इस दिन स्वर्ग से गंगाजी को भागीरथ धरती पर लाए और शिवजी की जटाओं में बांधा था। ऐसी पौराणिक मान्यताएं हैं।












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