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VIDEO : पाक बॉर्डर के पास NH 925 पर उतरे IAF के फाइटर जेट, जानिए बाड़मेर हवाई पट्टी की खासियत

जयपुर, 9 सितम्बर। भारतीय वायुसेना ने इतिहास रच दिया है। किसी नेशनल हाईवे पर लड़ाकू विमानों की आपातकालीन लैंडिंग के लिए देश की पहली हवाई पट्टी का निर्माण कर लिया है। हाईवे को रनवे बना दिया है। इससे पहले यमुना एक्सप्रेस-वे पर भी फाइटर प्लेन की इमरजेंसी लैंडिंग हो चुकी है।

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    राष्ट्रीय राजमार्ग-925 पर बनी हवाई पट्टी

    राष्ट्रीय राजमार्ग-925 पर बनी हवाई पट्टी

    राजस्थान के बाड़मेर-जालोर जिले की सीमा पर अड़गावा में राष्ट्रीय राजमार्ग-925 (National Highway 925A) पर बनी भारतीय वायुसेना की इमरजेंसी हाईवे हवाई पट्टी का गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उद्घाटन किया।

     हरक्युलिस विमान से आए केंद्रीय मंत्री

    हरक्युलिस विमान से आए केंद्रीय मंत्री

    दोनों केंद्रीय मंत्री दिल्ली के पालम एयरपोर्ट से बुधवार सुबह साढ़े बजे हरक्युलिस विमान में सवार होकर सीधे इसी एयर स्ट्रीप पर लैंड किए। इमरजेंसी लैंडिंग फिल्ड के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह व नितिन गडकरी के साथ एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत भी मौजूद रहे।

     एक दिन पहले वायुसेना का पूर्वाभ्यास

    एक दिन पहले वायुसेना का पूर्वाभ्यास

    इससे पहले बुधवार को यहां पर सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक भारतीय वायुसेना ने बाड़मेर की इस एयर स्ट्रीप पर लड़ाकू विमानों की आपात लैंडिंग का अभ्यास किया। इस दौरान सुखोई, 30 एमकेआई, मालवाहक सी 130 जे सुपर हरक्युलिस और एएन 32 जैसे विमान उतारे। सुखोई व हरक्युलिस विमान ने टच एंड गो फॉर्मेशन में लैंडिंग की।

     वाहनों का आवागमन पूरी तरह से रहा बंद

    वाहनों का आवागमन पूरी तरह से रहा बंद

    बता दें कि भारतीय वायुसेना ने चीन सीमा के पास दौलत बेग ओल्डी में हरक्युलिस व फाइटर जेट उतारने के बाद दूसरी बार इन्हें किसी देश की सीमा के करीब लैंड करवाया गया है। अभ्यास के दौरान नेशनल हाईवे के आस-पास के भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया गया। आम वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद रहा।

    भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बना नेशनल हाईवे 925

    भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बना नेशनल हाईवे 925

    बता दें कि भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए नेशनल हाईवे पर 925A यह हवाई पट्टी बाड़मेर-जालोर सीमा पर गगरिया-बखासर और सट्टा-गंधव खंड के नव विकसित टू-लेन पेव्ड शोल्डर का हिस्सा है। हवाई पट्टी के दोनों सिरों पर 40 गुणा 180 मीटर की दो पार्किंग भी बनाई गई है, ताकि फाइटर प्लेन को पार्किंग में रखा जा सक। पास ही डबल मंजिला एटीसी केबिन बनाया गया है।

    हवाई पट्टी की खासियत

    हवाई पट्टी की खासियत

    नेशनल हाईवे पर बनी इस हवाई पट्टी के पास साढ़े तीन किमी लंबी सर्विस लेन भी है। खुद हवाई पट्टी की तीन हजार मीटर लंबी और 33 मीटर चौड़ी है। हवाई पट्टी बनाने में कुल 32.95 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इस पर किसी भी वक्त भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग करवाई जा सकती है।

    40 किमी दूर है पाकिस्तान बॉर्डर

    40 किमी दूर है पाकिस्तान बॉर्डर

    बता दें कि भारत-पाकिस्तान के बीच तीन हजार 323 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है, जिसमें 1070 किलोमीटर सीमा राजस्थान के जैसलमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर और बाड़मेर जिले से होकर गुजरती है। ऐसे में राजस्थान के इन सरहदी जिलों का सामरिक महत्व है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से 40 किमी दूर बाड़मेर में इस खास हवाई पट्टी का निर्माण किया गया है।

     सीमावर्ती गांवों में तीन हैलीपेड

    सीमावर्ती गांवों में तीन हैलीपेड

    बाड़मेर जालोर सीमा पर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड के अलावा गांव भाखासर, सिंघानिया और कुंदनपुरा में तीन हेलीपैड का निर्माण भी किया गया है। जुलाई 2019 में हेलीपैड का निर्माण शुरू किया गया था, जो 19 माह में पूरा कर लिया गया।

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