jeenmata Story: चमत्कारों से भरी जीण माता की कहानी, औरंगजेब सेना पर छोड़ दी थी मधुमक्खियां
jeen mata History in Hindi: नवरात्रि 2023 के मौके पर जानिए राजस्थान के प्रमख शक्तिपीठों में से एक जीमधाम के बारे में। जीण माता मंदिर राजस्थान के सीकर शहर से करीब 29 किमी दूर है।

राजस्थान में देवी मां के अनेक मंदिर हैं। सबकी अपनी-अपनी मान्यताएं व परम्पराएं व कहानियां हैं। एक देवी मां ऐसी भी हैं, जो भक्तों के हाथों से प्रसाद के रूप में शराब का सेवन करती हैं। इन्हें जीणमाता के नाम जाना जाता है। जीणमाता का मंदिर राजस्थान के सीकर जिले की दांतारामगढ़ तहसील के गांव रलावता में अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित है। जीणमाता चमत्कारों की देवी है। मुगल बादशाह औरंगजेब की सेना भी नतमस्तक हो गई थी।

जीणमाता का जन्म स्थान कहां पर है?
जीणमाता की कहानी सीकर के पड़ोसी जिले चूरू से शुरू होती है। चूरू जिला मुख्यालय से करीब 19 किलोमीटर दूर गांव घांघू में राजपूत परिवार हुआ था। बचपन का नाम जीण था। इनके दो भाई हर्ष व हरकरण थे। जीण व अपने भाई हर्ष से गहरा लगाव था। भाई-बहन के अटूट स्नेह देख हर्ष की पत्नी से जीण की कहासुनी हो गई। भाभी ने जीण के सामने एक शर्त रख दी।

जीण की भाभी की शर्त क्या थी?
किदवंती है कि गांव घांघू में जीण की भाभी यानी हर्ष की पत्नी ने शर्त यह रखी थी कि कल वे दोनों सरोवर से पानी का मटका लेकर आएंगीं। फिर देखेंगीं कि हर्ष पहले मटका किसका उतारता है। जिससे ज्यादा स्नेह करेगा वो उसी का मटका पहले उतारेगा। जो भी शर्त हारेगी उसे घर छोड़कर कहीं चले जाना होगा।
रात को हर्ष की पत्नी ने झूठी कहानी बनाकर उसे पहले मटका उतारने के लिए तैयार कर लिया। इस बात का पता जीण को नहीं था। उसे पूरा विश्वास था कि भाई उससे बहुत स्नेह करता है इसलिए पहले मटका उसी का उतारेगा। शर्त के अनुसार ननद भाभी सरोवर से पानी भरकर मटका लेकर घर पहुंची तो हर्ष ने अपनी पत्नी के सिर से मटका पहले उतार दिया।

बहन के पीछे-पीछे भाई हर्ष भी सीकर पहुंचा
भाभी से शर्त हारने के बाद जीण घांघू छोड़कर सीकर जिले की तरफ आ गई। बहन को मनाने उसके पीछे-पीछे भाई हर्ष भी चला आया। सीकर जिले के गांव रलावता के पास जीण ने भाई को पूरी शर्त बताई तो हर्ष को हकीकत व पत्नी की चालाकी समझ आई।
इसके बाद जीण के घर नहीं लौटने पर हर्ष ने भी तय किया कि वो भी घांघू वापस नहीं जाएंगे। ऐसे में यहां जीण मां दुर्गा और हर्ष नजदीक के पहाड़ की चोटी पर भैरव की उपासना में लीन हो गया। फिर दोनों यहीं पर पूजे जाने लगे। भाई हर्षनाथ व बहन जीणमाता के रूप में। दोनों के यहां मंदिर बने हुए हैं।

जीण माता का चमत्कार क्या है?
जीण माता को मुधमक्खियों की देवी के रूप में भी पूजा जाता है। इससे जुड़ी कहानी भी बड़ी रोचक है। कहते हैं कि हिंदुओं के मंदिरों को तोड़ते हुए मुगल बादशाह औरंगजेब के सैनिक जीणधाम पहुंचे थे। यहां पर सैनिकों ने मंदिर को तोड़ना चाहा तो जीणमाता ने चमत्कार दिखाया और सैनिकों के सामने मुधमक्खियों की फौज भेज दी।
मुधमक्खियों के आक्रमण से मुगल सेना भाग खड़ी हुई और जीणमाता मंदिर सुरक्षित रहा। उस घटना के बाद औरंगजेब ने माता से माफी मांगी और अपने दरबार से हर महीने सवा मण तेल जीणमाता मंदिर में भेजने की परम्परा शुरू की, जो देवस्थान विभाग का गठन होने के बाद तक भी जारी रही। इसका जिक्र जीण चालीसा में भी है।

जीणमाता मेला 2023 की खास बातें
- शक्तिपीठ जीणधाम में चैत्र नवरात्रि के मौके 22 मार्च 2023 से लक्खी मेला शुरू हो गया है।
- नौ दिवसीय जीण मेले में देशभर से करीब 15 लाख श्रद्धालु पहुंचने का अनुमान है।
- जीणमाता मेले में 150 जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ड्रोन कैमरों से भी नजर रखी जा रही है।
- जीणमाता लक्खी मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। सीकर व आस-पास के जिलों से 800 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
- नौ दिन तक माता जीण का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। पूरा जीणधाम दिल्ली व कोलकाता से मंगवाए गए फूलों से सजाया जा रहा है।
जीणमाता मंदिर कैसे पहुंचे?
- निकटवर्ती एयरपोर्ट- सांगानेर जयपुर
- निकटवर्ती रेलवे स्टेशन -पलसाना
- निकटवर्ती बस स्टैण्ड- सीकर डिपो
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