Lok Sabha Election: क्या भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया का लोकसभा चुनावों से कट गया टिकट...?

Lok Sabha Election: राजस्थान में भाजपा की दूसरी लिस्ट आने से पहले आई एक चिठ्ठी से भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

लोकसभा चुनावों में जयपुर ग्रामीण और अजमेर लोकसभा सीट से टिकट की उम्मीदों की टकटकी लगाए इंतजार कर रहे सतीश पूनिया के समर्थकों को आज तगड़ा झटका लगा है।

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यह झटका उस समय लगा जब भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया को लोकसभा चुनावों में हरियाणा का प्रभारी नियुक्त कर दिया गया।

अब राजस्थान के सियासी गलियारों में चर्चा है कि विधानसभा से आउट होने के बाद अब पूनिया का लोकसभा सीट से भी टिकट कट गया है और संगठन के अनुभवाों को वरियता देते हुए उन्हे जाट लैंड हरियाणा की जिम्मेदारी दी गई है।

आपकों बता दे कि राजस्थान मेंं सतीश पूनिया ने जाट समाज के धुरंधर नेता माने जाते है और जाट समाज में एक मजबूत पकड़ भी रखते है।

जानिए कौन है सतीश पूनिया

छात्र जीवन से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ने वाले डॉ. सतीश पूनिया 1989 में राजस्थान विश्वविद्यालय से छात्रसंघ के महासचिव चुने गए थे। उसके बाद वे भाजयुमो के प्रदेश महामंत्री, प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे और पंजाब प्रभारी का दायित्व भी संभाला। पूनिया को अध्यक्ष बनाने में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री वी सतीश की अहम भूमिका रही है।

सतीश पूनिया वर्ष 2004 से 2014 तक लगातार चार बार बीजेपी संगठन में प्रदेश महामंत्री रहे. वर्ष 2011 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की जन चेतना यात्रा के राजस्थान में संयोजक रह चुके हैं। पूनिया लो-प्रोफाइल जाट नेता माने जाते हैं. पूनिया लंबे समय इस प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में शामिल थे।

वर्ष 2010 और 2015 में हरियाणा विधानसभा चुनावों में सक्रिय निभा चुके पूनिया ने वर्ष 2000 में सादुलपुर से विधानसभा का उपचुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। उसके बाद वर्ष 2013 में आमेर से विधानसभा लड़ा, लेकिन वहां भी सफलता नहीं मिली. वर्ष 2018 में वे आमेर से विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए।

पूनिया को केन्द्रीय नेताओं से बेहतर तालमेल के लिए जाना जाता है। वे संघ परिवार को नेताओं के चेहते भी माने जाते हैं। वर्तमान में उनके पास बीजेपी के सदस्यता अभियान के संयोजक की जिम्मेदारी है।

प्रदेश में जल्द ही नगर निकाय और पंचायत चुनाव होने हैं। इसके साथ ही 2 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव होने भी हैं। ये चुनाव पूनिया के लिए अग्निपरीक्षा वाले साबित होंगे।

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