राजस्थान : पिता और 2 बेटे एक साथ उतरे सरपंच चुनाव के मैदान में, वजह बनी 'अलमारी'
बूंदी। राजस्थान पंचायती राज चुनाव 2020 के तहत ग्राम पंचायतों में चुनावी सरगर्मियां हैं। 17 का पहला और 22 को दूसरा चरण पूरा हो गया। अब तीसरे चरण का चुनाव 29 जनवरी को है।

बूंदी की लक्ष्मीपुरा ग्राम पंचायत का मामला
सरपंच चुनावों में एक ही ग्राम पंचायत से बड़ी संख्या में उम्मीदवार खड़े होने के मामले तो खूब सामने आते हैं, मगर राजस्थान के बूंदी जिले की तालेड़ा पंचायत समिति में एसटी के लिए आरक्षित ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुरा में पिता और उसके दो बेटे एक साथ चुनावी मैदान में उतरे हैं। तीनों ही अपने-अपने प्रचार में जुटे हुए हैं। एक ही ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुरा से के एक ही परिवार से तीन-तीन प्रत्याशियों का चुनाव लड़ना कोई इत्तेफाक या राजनीतिक स्टंट नहीं बल्कि इसके पीछे एक रोचक किस्सा है, जो अलमारी से जुड़ा है।

20 साल से 'अलमारी' वाले की जीत
बताया जा रहा है कि लक्ष्मीपुरा में बीते 20 साल से एक अजब संयोग देखने को मिल रहा है और वह है कि जिस प्रत्याशी को चुनाव चिह्न अलमारी आवंटित होती है वो ही प्रत्याशी सरपंच का चुनाव जीतता आ रहा है। इस बार लक्ष्मीपुरा से नौ प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं। लक्ष्मीपुरा ग्राम पंचायत के गांव देवरिया निवासी गोमदा भील, उसका बड़ा बेटा रामदेव भील और छोटा बेटा प्रहलाद भील ने भी पर्चा भरा है ताकि किसी भी एक को चुनाव चिह्न अलमारी आवंटित हो जाए।
किसी और को ही आवंटित हुआ 'अलमारी' चिह्न
इसके पीछे भी एक वजह यह बताई जा रही है कि गांव देवरिया का धन्नालाल भील भी सरपंच चुनाव में खड़ा हुआ है। धन्नालाल और गोमदा भील के परिवारों के बीच अनबन है। तीनों पिता पुत्र चुनाव मैदान में इसलिए भी कूदे कि धन्नालाल को आलमारी का चुनाव चिह्न नहीं मिले, लेकिन हुआ यह कि लेकिन अल्फाबेट के आधार पर उन्हीं के गांव देवरिया के धनराज भील को अलमारी चिन्ह मिल गया। हालांकि गोमदा के परिवार ने अब तय किया है कि वे बड़े बेटे को चुनाव जीताने के प्रयास करेंगे।












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