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राजस्थान के इस शहर में भाई दूज के दिन क्यों पूजे जाते हैं गधे?, जानिए कैसे कायम हुई यह अनूठी परंपरा

Rajasthan News: राजस्थान के मेवाड़ के भीलवाड़ा जिले में स्थित मांडल शहर एक अनोखी परंपरा का केंद्र है। यहां कुम्हार समुदाय सात दशकों से जानवर गधे का सम्मान करने के लिए एक विशेष आयोजन करता आ रहा है। यह अनूठा उत्सव जिसे वैशाख नंदन के नाम से जाना जाता है। हर साल दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा के दिन आयोजित किया जाता है और इस परंपरा में पूरे शहर का योगदान होता है।

कुम्हार समुदाय और गधों के बीच एक ऐतिहासिक संबंध

कुम्हार समुदाय का गधों के साथ एक पुराना संबंध है। मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए तालाबों से मिट्टी ढोने का काम गधों पर ही निर्भर करता था। जिससे यह जानवर कुम्हारों की आजीविका का अहम हिस्सा बन गया। इस परंपरा के बारे में जानकारी देते हुए स्थानीय निवासी बताते हैं कि हमारे पूर्वजों के समय में हर घर में गधे होते थे और वे हमारी रोजी-रोटी का आधार थे। आधुनिक साधनों के आगमन से गधों की संख्या में गिरावट आई है। लेकिन हम अब भी उन्हें भुला नहीं सकते और उनकी पूजा करते हैं। जैसे किसान अपने बैलों की करते हैं।

donkey

वैशाख नंदन उत्सव की रंग-बिरंगी शुरुआत

यह उत्सव प्रताप नगर से शुरू होता है। यहां गधों को सजाया जाता है। रंग-बिरंगे रंगों और मालाओं से सजे हुए गधों को शहर के चौराहे पर लाया जाता है। जहां एक पुजारी उनका आशीर्वाद देकर मिठाई खिलाता है। इसके बाद शहर में गधों की एक विशेष दौड़ आयोजित की जाती है। गधों के पैरों में पटाखे बांधे जाते हैं। जिससे चिंगारियां निकलती हैं और यह अद्वितीय आयोजन एक दौड़ का रूप ले लेता है।

सांस्कृतिक विरासत को संजोने की एक मिसाल

आज जब आधुनिकता ने पारंपरिक तरीकों को बदल दिया है और गधों पर निर्भरता कम हो गई है। फिर भी कुम्हार समुदाय द्वारा इस परंपरा का पालन उनकी श्रद्धा और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। मंडल का वैशाख नंदन उत्सव न केवल एक उत्सव है। बल्कि यह गधों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और समुदाय के लिए उनके योगदान की सराहना का प्रतीक है।

इस प्रकार के त्योहारों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि भारत के विविध सांस्कृतिक परिदृश्य में प्रत्येक जीवन रूप का आदर बना रहे। मंडल का वैशाख नंदन उत्सव इसी अनोखी परंपरा का प्रतीक है। जो पीढ़ियों तक चली आएगी। जिससे आने वाले समय में भी कुम्हार समुदाय और उनके गधों का यह विशेष रिश्ता जीवित रहेगा।

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