अनोखी शादी: गाय ने सांड के साथ लिए सात फेरे, जानिए क्यों करवाते हैं गौ विवाह?
सीकर जिले के फतेहपुर कस्बे में स्थित पिंजरापोल गोशाला में गौ विवाह हुआ। गाय और नंदी की शादी सनातन वैवाहिक रीति रिवाजों के तहत संपन्न कराई गई।
राजस्थान में गाय और सांड की अनोखी शादी चर्चा में है। यह शादी सीकर जिले के फतेहपुर कस्बे में स्थित पिंजरापोल गोशाला में हुई है।
गौ माता और नंदी का विवाह की रस्में सनातन वैवाहिक रीति रिवाजों के तहत संपन्न करवाई गई।

मीडिया से बातचीत में फतेहपुर पिंजरापोल गौशाला समिति के सुनील बुबना ने बताया कि विधि विधान के साथ गो माता व नंदी महाराज का विवाह धूमधाम के साथ करवाया गया। पांच पंडितों के सानिध्य में विधिवत रूप से मंत्रोच्चारण के साथ माता वह नंदी महाराज का विवाह करवाया। विवाह के मुख्य यजमान की भूमिका दुर्गा प्रसाद व विजयकुमार देवड़ा के परिवार ने निभाई। उन्होंने ही गौदान किया।
पंडित अमित पुजारी ने बताया कि गाय और सांड का विवाह पितृ शांति और वंश वृद्धि के लिए करवाया जाता है। हालांकि धार्मिक विद्वानों की मानें तो गाय-नदी की शादी को लेकर शास्त्रों में कोई उल्लेख नहीं है, लेकिन यह विवाह लोगों की भावनाओं का प्रतीक है।
पिंजरापोल समिति के सुनील बुबना ने बताया कि गाय और नंदी के विवाह के बाद उनको फतेहपुर के मण्डावा रोड स्थित गौशाला में छोड़ दिया। फतेहपुर की पिंजरापोल गोशाला में 1154 गोवंश हैं। गाय-नंदी के दो जोड़ों का विवाह करवाया जा चुका है।












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