झुग्गी झोपड़ी वाली 'बहन' की लाडो की शादी में व्हाट्सप्प ग्रुप वाले 'भाइयों' ने भरा भात

Churu News in Hindi, चूरू। सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल किया जाए तो यह कई मायनों में कमाल कर दिखाता है। कहीं यह किसी रोते हुए के आंसू पौंछ देता है तो कहीं किसी परिवार के जीने की राह आसान कर देता है। ऐसा ही एक अनूठा मामला राजस्थान के चूरू जिले में सामने आया है। यहां झुप्पी झोपड़ी में रहने वाले एक परिवार के लिए सोशल मीडिया मददगार साबित हुआ है। इस गरीब परिवार को लाडो के हाथ पीळे करने की चिंता सता रही थी। पीड़ा सोशल मीडिया पर शेयर हुई तो मदद को कई लोग आगे आ गए।

परिवार के पास दो वक्त की रोटी तक का जुगाड़ नहीं

परिवार के पास दो वक्त की रोटी तक का जुगाड़ नहीं

हुआ यूं कि चूरू-जयपुर रोड पर पुलिया के पास देपालसर रोड झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले एक परिवार की बेटी लाछा की शादी 5 मई को तय की गई। परिवार के पास दो वक्त की रोटी तक का जुगाड़ नहीं था। बेटी की शादी की चिंता उन्हें सता रही थी। 1 मई को लाडो लाछा की मां चूरू जिला मुख्यालय पर संचालित आपणी पाठशाला पहुंची और यहां की टीम के कांस्टेबल धर्मवीर जाखड़, दिनेश सैनी व सुमित गुर्जर, ओमप्रकाश भूकल, संदीप जांगिड़ व दीपचंद सहारण आदि को अपनी पीड़ा बताई। आपणी पाठशाला की टीम ने लाछा के परिवार की परेशानी को फेसबुक व व्हाट्सप्प पर शेयर कर लोगों से मदद की अपील की।

तारानगर वाले आए धर्म के भाई बनकर

तारानगर वाले आए धर्म के भाई बनकर

नतीजा यह रहा कि चूरू जिले के तारानगर के एक व्हाट्सप्प ग्रुप में जब यह पोस्ट पहुंची तो उस ग्रुप में जुड़े समाजसेवी श्रवण गडाणा, एलडी जोशी, रमेश बिजारनियां, राकेश शर्मा, सदाम, प्रहलाद भाकर, राजवीर ज्याणी, मुकेश सोनी आदि ने लाछा की शादी में मदद की ठानी और उसके घर रविवार को भात लेकर पहुंच गए। बता दें कि भात राजस्थान में शादी में निभाई जाने वाली एक परम्परा ​है, जिसमें दुल्हन की मां के मायके के लोग उसकी बेटी की शादी पर भात लेकर पहुंचते हैं, जिसमें नकदी व शादी का सामान दिया जाता है।

दुल्हन लाछा की मां की भर आंखें

दुल्हन लाछा की मां की भर आंखें

बेटी की शादी पर उसकी झुग्गी झोपड़ी में तारानगर से भात लेकर आए 10-12 अनजान भाइयों को देख लाछा की मां की आंख आई। दुल्हन की मां व व्हाट्सप्प ग्रुप वाले 'भाइयों' ने बहन को भात की चूनरी ओढ़ाने से लेकर भातियों के माथे पर तिलक वो सभी रस्मे​ निभाई, जो सगे भाई-बहन निभाते हैं। ये भाई भात में 31 सौ रुपए नकदी, सोने की नाक कील, चांदी की अंगूठी, बर्तन, कपड़े और जरूरत की चीजें लेकर आए। इसके अलावा डबल बैड, बड़ी संदूक, गददे, तकिया, बैडशीट, बर्तन, पंखा, प्रेस आदि दम्पती के घर पहले ही भेज दिए थे।

हाजी साहब ने उठाया शादी का खर्च

हाजी साहब ने उठाया शादी का खर्च

व्हाट्सप्प ग्रुप वाले 'भाइयों' के अलावा भी लाछा की शादी में लोगों ने उत्साहपूर्वक मदद की। चूरू के हाजी साहब शादी में लगाए गए टेंट, बारात का खाना व खाना बनाने की भटटी निशुल्क उपलब्ध करवाई। इसके अलावा कई जगहों के लोगों ने कन्यादान भी भेजा।

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