Rajasthan News: मुख्यमंत्री भजनलाल ने ईआरसीपी को लेकर ट्रैक्टर पर बैठ निकाली "आभार यात्रा",जानिए कौन थे सवार

ERCP Project Rajasthan: राजस्थान में लम्बे समय ईआरसीपी को लेकर उलझी गुत्थी सुलझते ही आज मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह ट्रैक्टर पर सवार होकर भरतपुर पहंच गए।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जब केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह के साथ ईआरसीपी की आभार यात्रा में पहुंचे तो लोगों ने पलक पांवड़े बिछाकर जोरदार स्वागत किया।

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इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपने अलग ही अंदाज में नजर आए। मुख्यमंत्री भजनलाल ने जहां ट्रैक्टर का स्टेयरिंग सम्भाला तो वहीं गजेंद्र सिंह शेखावत बगल में बैेठे नजर आए।

मुख्यमंत्री भजनलाल ने अगले पांच साल में राजस्थान के हर घर में जल पहुंचाने का वादा किया। साथ ही ERCP प्रोजेक्ट को जल्द ही धरातल पर उतारने की बात भी कही है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आज से राजस्थान के पूर्वी जिलों भरतपुर,करौली,दौसा,सवाईमाधोपुर,गंगापुरसिटी और टोंक में आभार यात्रा निकाल रहे है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि हमने सिर्फ डेढ़ महीने में ईआरसीपी प्रोजेक्ट लागू कर दिया। उन्होंने भरतपुर में ईआरसीपी आभार यात्रा के दौरान कह कि ईआरसीपी की मांग हमारे घोषणापत्र में शामिल थी और इसे सिर्फ डेढ़ महीने में लागू कर दिया गया।

सीएम ने कहा मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि हम इसे पांच वर्षों में पूरा कर देंगे। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को कहा कि अगले पांच साल में राजस्थान के हर घर में जल रहेगा।

उन्होंने कहा कि पूर्वी राजस्थान के जिले पानी की समस्या से जूझ रहे थे। जल्द ही पीएम मोदी ईआरसीपी का शिलान्यास करेंगे। सीएम ने कहा कि अगले पांच वर्षों में हर घर, बांध और तालाब में पानी होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से पूर्वी राजस्थान के किसानों, मातृ शक्ति व आमजन के जीवन में सुखद बदलाव आएगा और गांव, खेत तथा घरों तक पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। ईआरसीपी की डीपीआर में सम्मिलित 26 बांधों के अलावा आगे चलकर इसमें 122 बांध और जोड़ने की योजना है।

एमजेएसए 2.0 के तहत बनेंगे 5 लाख जल संग्रहण ढांचे

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि वर्ष 2013 से 2018 में हमारी सरकार ने जल संरक्षण एवं संग्रहण को प्रोत्साहन देने के लिए मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान की शुरूआत की थी।

इसे आगे बढ़ाते हुए हमने बजट में 11 हजार 200 करोड़ रुपये का प्रावधान करते हुए मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान 2.0 शुरू किया है।

इसके तहत आगामी 4 वर्षों में 20 हजार गांवों में 5 लाख जल संग्रहण ढांचे बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सीकर, चूरू और झुंझुनूं को यमुना नदी का पानी उपलब्ध कराने के लिए ताजेवाला से प्रवाह प्रणाली के क्रम में केन्द्र सरकार, हरियाणा सरकार और राजस्थान सरकार के बीच एमओयू हुआ है। इससे इन तीनों जिलों की जल आवश्यकता की पूर्ति सुनिश्चित होगी।

अलवर के 3, भरतपुर के 5 बांधों में आएगा पानी

मुख्यमंत्री ने आभार सभाओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस परियोजना से अलवर जिले के जयसमंद बांध, घाट पिकअप वियर और धमरेण बांध को पानी मिलेगा।

इससे करीब 5 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होगी तथा लगभग 20 हजार किसानों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से भरतपुर जिले के कुल 5 बांधों बंध बारेठा, अजान लोअर, अजान अपर, लालपुर और भटावाली में पानी लाया जाएगा।

इससे करीब 14 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होगी तथा लगभग 56 हजार किसान लाभान्वित होंगे। साथ ही, बंध बारेठा बांध से ऐतिहासिक महत्व की सुजानगंगा में भी पानी डाला जाएगा।

ईआरसीपी परियोजना में केन्द्र की होगी 90 प्रतिशत हिस्सेदारी- केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदर्शी सोच के अनुरूप मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना के बाद देश की यह दूसरी नदी लिंक परियोजना है। इसमें पार्वती-कालीसिंध-चम्बल नदी के साथ ईआरसीपी (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना) को एकीकृत करते हुए लिंक किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर राजस्थान में करीब 45 हजार करोड़ और मध्यप्रदेश में 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।

एकीकृत ईआरसीपी आजादी के बाद प्रदेश की सबसे बड़ी नहर परियोजना होगी जिसमें प्रदेश के नये जिलों सहित कुल 21 जिलों की साढ़े 3 करोड़ आबादी को अगले 5 दशक तक पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

साथ ही, इससे प्रदेश के पूर्वी हिस्से में 2 लाख 80 हजार हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई हेतु जल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि पहले जहां इस परियोजना में केन्द्र से 60 प्रतिशत राशि मिलना ही प्रस्तावित थी।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप अब इस परियोजना में केन्द्र की फडिंग बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे राजस्थान को परियोजना की लागत का मात्र 10 प्रतिशत ही वहन करना पड़ेगा।

आभार सभाओं और धन्यवाद कार्यक्रमों में जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म सहित सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

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