Caste Census India 2025: जाति पूछ-पूछकर जनगणना होने से राजस्‍थान की राजनीति पर कितना असर पड़ेगा?

Caste Census India 2025: केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को कैबिनेट बैठक में पूरे भारत में जातिगत जनगणना कराने के ऐतिहासिक फैसले को मंजूरी दे दी है। इसके लिए विपक्ष की लंबे समय से मांग कर रहा था। अब माना जा रहा है कि यह निर्णय आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर लिया गया है। उल्लेखनीय है कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पहले ही जातिगत गणना की पहल की थी, जिसे बाद में रोक दिया गया था।

अब यह कवायद केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा असर अन्‍य राज्यों की सामाजिक और राजनीतिक संरचना पर पड़ने की संभावना है। खासकर राजस्थान जैसे राज्य में, जहां लंबे समय से जातीय समीकरणों का सियासी प्रभाव देखने को मिलता रहा है। जाति विशेष के आरक्षण आंदोलनों ने सरकारों को झुकने पर मजबूर किया है।

Caste Census India 2025

Impact of caste census in Rajasthan: जातिगत जनगणना का राजस्थान में संभावित प्रभाव

राजस्थान की राजनीति में ओबीसी वर्ग (विशेषकर जाट, गुर्जर, माली, मीणा और बिश्नोई समुदाय) की भूमिका हमेशा से अहम रही है। जातिगत जनगणना 2025 से इन वर्गों की वास्तविक जनसंख्या सामने आएगी। उसके बाद आरक्षण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सरकारी योजनाओं में हिस्सेदारी को लेकर नई मांगें उठ सकती हैं।

राजस्‍थान के जाट: राजस्‍थान में जाट समुदाय अब जनसंख्या आधारित अधिक आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी की मांग कर सकता है।
राजस्‍थान के गुर्जर: गुर्जर तो राजस्‍थान में आरक्षण के लिए हिंसक आंदोलन तक कर चुके हैं। अब जाति आधारित जनगणना से गुर्जर समाज की मांग को नई दिशा मिल सकती है।
राजस्‍थान के एससी-एसटी: एससी/एसटी वर्ग-मेघवाल, वाल्मीकि, भील, गरासिया जैसे समुदायों को योजनाओं में पारदर्शिता और भागीदारी को लेकर सशक्त आधार मिलेगा।
राज्य के आदिवासी क्षेत्रों जैसे डूंगरपुर, बांसवाड़ा और भीलवाड़ा में स्थानीय मुद्दे और अधिक मुखर हो सकते हैं। साथ ही, दलित समुदाय सामाजिक न्याय और सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी को लेकर अधिक जागरूकता दिखा सकता है।

Rajasthan caste politics: राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना

राजस्‍थान में जातिगत जनगणना के आंकड़ों के सामने आने से दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस अपनी रणनीतियों में बड़े बदलाव कर सकते हैं। जानकारों के अनुसार भाजपा अपने पारंपरिक सवर्ण वोटबैंक के साथ-साथ ओबीसी और दलित वर्ग में पैठ बढ़ाने की कोशिश करेगी। वहीं, कांग्रेस इन आंकड़ों के आधार पर योजनाओं और घोषणाओं को नए सिरे से डिजाइन कर सकती है। नए राजनीतिक फ्रंट और क्षेत्रीय नेताओं के उभार की भी संभावना जताई जा रही है, जैसे माली, विश्नोई, सैनी, गुर्जर समुदाय के नेताओं की स्वतंत्र भूमिका।

OBC reservation demand: राजस्थान में आरक्षण

राजस्थान में पहले से ही आरक्षण की सीमा 50% के पार जा चुकी है। जातिगत जनगणना के बाद, यदि किसी जाति की जनसंख्या अधिक पाई जाती है, तो यह EWS आरक्षण और OBC वर्ग के उप-वर्गीकरण को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है।

राजस्‍थान के जातीय आंदोलन

राजस्‍थान गुर्जर आंदोलन: साल 2007 से 2019 बार-बार आरक्षण की मांग को लेकर रेलवे ट्रैक तक जाम हुए।
राजस्‍थान जाट आंदोलन: देश में अटल वाजपेयी सरकार के समय सीकर की रैली में आरक्षण की घोषणा की गई थी।
सामाजिक न्याय मंच: साल 2003 लोकेंद्र सिंह कालवी व देवी सिंह भाटी द्वारा शुरू किया गया, जिसका मकसद आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्ण समुदायों को प्रतिनिधित्व दिलाना था।

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जातिगत जनगणना पर राजस्‍थान मुख्‍यमंत्री क्‍या बोले?

देश में जातिगत जनगणना को मंजूरी मिलने के साथ ही राजस्‍थान के नेताओं के बयान भी आने शुरू हो गए। हर कोई इसका श्रेय अपनी पार्टी व नेता को देता दिखा।

राजस्‍थान मुख्‍यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे नरेंद्र मोदी सरकार का ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय बताते कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने न केवल दशकों तक सत्ता में रहते हुए जातिगत जनगणना का घोर विरोध किया, बल्कि विपक्ष में रहते हुए भी इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर केवल राजनीतिक लाभ के लिए दोहरा मापदंड अपनाया। इस अभिनंदनीय निर्णय से समाज के वंचित वर्गों को न्याय मिलेगा, सामाजिक न्याय की स्थापना होगी और विकास की मुख्यधारा में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित होगी। इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार एवं धन्यवाद!

जातिगत जनगणना पर गोविंद डोटासरा क्‍या बोले?

राजस्‍थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि 'जाति जनगणना न्याय दिलाएगी। कांग्रेस 50% आरक्षण की दीवार हटाएगी। जाति जनगणना का निर्णय राहुल गांधी के न्याय संकल्प की देश में गूंज और कांग्रेस की नीति की जीत है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी जी की दूरदृष्टि और न्याय के संकल्प ने आज देश में दो तिहाई वंचित आबादी की तरक्की के लिए न्याय की नींव रखी है। आखिरकार केंद्र की मोदी सरकार को राहुल जी की जाति जनगणना की बात माननी पड़ी।

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