अणसी देवी : जिंदा थीं तो घर-घर बजाती ढोल, मरने पर ग्रामीणों ने श्मशान की जमीन तक नसीब नहीं होने दी
बाड़मेर, 2 जुलाई। राजस्थान के बाड़मेर जिले में दफन शव को बाहर निकालने का मामला सामने आया है। वृद्ध महिला अणसी देवी जब जिंदा थीं तो गांव के घर-घर में ढोल बजाया करती थी, मगर जब दुनिया को अलविदा कहा तो ग्रामीणों ने उसे गांव के सार्वजनिक श्मशान की जमीन भी नसीब नहीं होने। गांव के कुछ दबंग नहीं चाहते थे कि अणसी देव का शव सार्वजनिक श्मशान में दफनाया जाए। ऐसे में अणसी देवी के परिजनों को उसका शव दफन किए जाने के तीसरे दिन वापस निकालकर दूसरी जगह खेत में दफनाना पड़ा है।

हुआ यूं कि बाड़मेर के सदर पुलिस थाना इलाके के गांव रामसर कुआं निवासी 90 वर्षीय अणसी देवी की 27 जून को मौत हो गई थी। परिवारों वालों ने उसके शव को गांव सार्वजनिक श्मशान घाट में ले जाकर दफना दिया। दो दिन बाद जब गांव वालों को इस बात का पता लगा तो उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने परिवार को बुलाया और अणसी देवी के दफनाए गए शव को बाहर निकालकर श्मशान घाट से ले जाने का दबाव बनाया। पीड़ित परिवार को कहा गया कि शव बाहर नहीं निकाला तो तुम्हारा गांव में खाना-पीना और रास्ता बंद करवा देंगे।

मीडिया से बातचीत में अणसी देवी के पोते जोगेंद्र व गणपत ने बताया कि उनकी दादी गांव के घर-घर में शादी से लेकर बच्चे के जन्म पर ढोल बजाने का काम करती थीं। मौत के बाद उनका शव सार्वजनिक श्मशान में दफनाया गया था। ग्रामीणों के विरोध के बाद तहसीलदार व एसडीएम को इस संबंध में जानकारी दी कि उनकी दादी का दफन शव निकलवाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, मगर अधिकारियों ने सुनवाई नहीं की। ऐसे में उन्हें सार्वजनिक श्मशान में दफन दादी अणसी देवी का शव जेसीबी की मदद से बाहर निकालकर ट्रैक्टर ट्रॉली में डालकर खेत में ले जाकर दफनाया है।












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